-मनोहर सिंह राठौड़
691 views
1 months ago
जय श्री सीताराम 🌹 जय हिन्दू राष्ट्र 🌹 🙏 ☀️ सुन्दर काण्ड ☀️ दोहा १९☀️ पृष्ठ २०☀️ सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना॥ मारसि जनि सुत बाँधेसु ताही । देखिअ कपिहि कहाँ कर आही ॥१॥ पुत्र का वध सुनकर रावण क्रोधित हो उठा और उसने [अपने जेठे पुत्र] बलवान् मेघनाद को भेजा। (उससे कहा कि-) हे पुत्र ! मारना नहीं; उसे बाँध लाना। उस बंदर को देखा जाय कि कहाँ का है ॥१॥ चला इंद्रजित अतुलित जोधा।बंधु निधनसुनि उपजाक्रोधा॥ कपि देखा दारुन भटआवा।कटकटाइ गर्जा अरु धावा॥२॥ इन्द्र को जीतने वाला अतुलनीय योद्धा मेघनाद चला। भाई का माराजाना सुन उसे क्रोध होआया। हनुमान् जीने देखा कि अब की भयानक योद्धाआया है। तब वे कटकटाकर गर्जे और दौड़े। अति बिसाल तरु एक उपारा। बिरथ कीन्ह लंकेस कुमारा॥ रहे महाभट ताके संगा। गहिगहि कपि मर्दइ निजअंगा॥३॥ उन्होंने एक बहुत बड़ा वृक्ष उखाड़ लिया और [उसके प्रहार से] लंकेश्वर रावण के पुत्र मेघनाद को बिना रथ का कर दिया (रथ को तोड़ कर उसे नीचे पटक दिया)। उसके साथ जो बड़े-बड़े योद्धा थे, उनको पकड़-पकड़ कर हनुमान् जी अपने शरीर से मसलने लगे ॥३॥ तिन्हहि निपाति ताहिसन बाजा।भिरे जुगल मानहुँ गजराजा॥ मुठिका मारि चढ़ा तरु जाई। ताहि एकछन मुरुछा आई॥४॥ उन सबको मारकर फिर मेघनाद से लड़ने लगे। [लड़ते हुए वे ऐसे मालूम होते थे] मानो दो गजराज (श्रेष्ठ हाथी) भिड़ गये हों। हनुमान् जी उसे एक घूँसा मारकर वृक्ष पर जा चढ़े। उसको क्षण भर के लिये मूर्च्छा आ गयी ॥४॥ उठि बहोरि कीन्हिसि बहुमाया।जीति न जाइ प्रभंजन जाया॥ फिर उठकर उसने बहुत माया रची; परन्तु पवन के पुत्र उससे जीते नहीं जाते ॥५॥ दो०- ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार । जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥१९॥ अन्तमें उसने ब्रह्मास्त्र का सन्धान (प्रयोग) किया, तब हनुमान् जी ने मन में विचार किया कि यदि ब्रह्मास्त्र को नहीं मानता हूँ तो उसकी अपार महिमा मिट जायगी ॥१९॥ #सीताराम भजन