Vijay Dass
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#GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . आदि सनातन पंथ आदि सनातन पंथ अथार्त धर्म अनादि काल से चला आ रहा है। सनातन धर्म से पूर्व का धर्म आदि सनातन धर्म कहलाता है। आदि सनातन धर्म' से उत्पन्न हुए सनातन धर्म से ही अन्य धर्मों की उत्पत्ति हुई है। संस्कृत के पुरातन कोष में कहीं पर हिन्दु शब्द नहीं लिखा है। कालांतर में सनातन धर्म को ही हिन्दू धर्म कहा जाने लगा। सनातन धर्म का आधार पुराण है तथा आदि सनातन धर्म' का आधार चार वेद तथा सूक्ष्मवेद है। गीता जी चारो वेदों का सार है। वेदों का ज्ञान ब्रह्मा जी ने ऋषि महर्षियों को दिया और ऋषियों ने उसमें अपना अनुभव मिला कर अपने अनुभव का बोध पुराणों को रचा। उसी आधार से जनमानस भक्ति साधना करने लगा। इसलिए सनातन धर्म का भक्ति आधार पुराण है। तथा आदि सनातन धर्म को पूर्ण परमात्मा कविर्देव अथार्त कबीर साहिब प्रत्येक युग में संत ऋषि रूप में प्रकट होकर वेद तथा सूक्ष्मवेद अथार्त कबीर साहिब के मुख कमल से बोली वाणी के आधार पर प्रकट है। लेकिन अज्ञानता व काल प्रेरणा वश मानव समाज उस तत्वज्ञान को स्वीकार नहीं कर पाता। परमात्मा को नहीं पहचान पाने तथा नकली गुरुओं आचार्यों द्वारा गुमराह करने के कारण अधिक विस्तार नहीं हो पाता। सनातन धर्म की साधना ॐ मंत्र तक सीमित है और यही सनातन धर्मियों का अंतिम मंत्र है। तथा आदि सनातन धर्म की साधना का मंत्र ॐ तत् सत् है, सांकेतिक है। इन तीनों मंत्र की साधना की विधि भी अलग-अलग है। ॐ मंत्र सनातन धर्मियों का अंतिम मंत्र है। उससे नीचे के जितने भी मंत्र ऋषियों ने खोज कर बनाये उनसे सिद्धियां प्राप्त हुई, मोक्ष नहीं मिला। वस्तुतः पूर्ण मोक्ष ॐ मंत्र के जाप से नहीं है। ॐ मंत्र से अधिकतम ब्रह्मलोक पाया जा सकता है, पुनरावृत्ति बनी रहेगी। सनातन धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का विधान है व मोक्ष प्राप्त करने की अन्य विधि बताई जाती है। सच्चाई यह है कि "आदि सनातन धर्म" के मोक्ष के अलावा किसी भी प्रकार का मोक्ष पूर्ण नहीं है। पूर्ण मोक्ष सिर्फ "आदि सनातन धर्म" की साधना से ही प्राप्त किया जा सकता है। अन्य किसी भी साधना से क्षणिक लाभ या अधूरा मोक्ष है। "आदि सनातन धर्म" की साधना को करने के लिए सनातन धर्म के ॐ मंत्र के जाप के आगे अन्य प्रमुख पाँच देवी-देवताओं के मंत्र जाप के साथ उनका आदर भी जरूरी है। "आदि सनातन धर्म" की साधना में सनातन धर्म के मूल देवी-देवताओं की जरूरत पड़ती है। उनके यथार्थ मंत्रों की साधना करके कर्जा उतार कर पूर्ण मोक्ष की राह पायी जाती है। सनातन धर्म की साधना से सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती है। इतिहास में वर्णन है कि सिद्धियों का सदुपयोग कम और दुरुपयोग अधिक हुआ है। अतः सिद्धियों को प्राप्त करना "आदि सनातन धर्म" की साधना नहीं है, अपितु अपना निज स्थान अर्थात् शाश्वत स्थान सतलोक प्राप्त करने के लिए यह साधना की जाती है। संत रामपालजी महाराज "आदि सनातन धर्म" के उपासक हैं व आदि सनातन धर्म की दीक्षा देते हैं। संत रामपाल जी महाराज देवी देवताओं को पूर्ण आदर देने तथा पूर्णब्रह्म की पूजा करने की बात करते हैं। यह पूर्ण मोक्ष के लिए जरूरी है। सतगुरू रामपाल जी महाराज कोई नया धर्म खड़ा नहीं कर रहे अपितु सभी धर्मों का मूल "आदि सनातन धर्म" की यथार्थता को बता रहे हैं। उसी 'आदि सनातन धर्म' के रास्ते पर चलकर हम मानवता भाईचारा उत्पन्न कर सकते हैं। पूर्ण सन्त रामपाल जी महाराज ने आदि सनातन धर्म की पुनः स्थापना की है। उनका नारा है कि जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। हिंदु मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। Factful Debates YouTube Channel #sant ram pal ji maharaj #me follow