#GodMorningTuesday
#2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी
. #वाणी गर्भ उत्पत्ती का अद्भुत रहस्य
धर्मदास एक कथा सुनाऊँ,अद्भुत सत्य अब तुम्हें बताऊ।
सबही जीव गर्भ में जावैं, कौल बान्ध कै बाहर धावैं।
चूके कौल गरभ का भाई, बारम्बार गरभ में जाई।
नौ नाथ सिद्धि चौरासी भारी, उनहूँ देह गरभमें धारी।
नौ अवतार विष्णु जो लीन्हा, उनहूँ गर्भ वसेरा कीन्हा।
तेतिस किरोडी देव कहाये, गर्भ वास महँ देह बनाये।
जोगी जंगम औ तप धारी, गर्भ वास में देह सवाँरी।
गर्भ वास तब छूटे भाई, जब समरथ गुरू बाहँ गहाई।
ओंधे मुख झूले लटकंता, मैल बहुत तहँ कीच रहंता।
जठराग्नि तहं बहुत सतावै, संकट गर्भ तहँ अन्त न आवै।
महा दुःख सो गरभ में पावे, बहुत बैराग हियामें आवे।
जब जीव गर्भमें ज्ञान बिचारा,अब मैं सुमरूं सिरजन हारा।
सोच मोह विज कछू न कीजै,अब सद्गुरू का शरणा लीजै।
जिव अपने दिल माहि बिचारे,तब समर्थ को कीन पुकारे।
बहुत सांकरी पिंजर पोई,तड़फडै़ बहुत निकसे नहिं जोई।
मुखसों बोल निकसनहिं आवै विलापकर मनमे पछितावै।
तादुख गति कासु कहीजै, कर्म उन्मान तहैं दुःख सहीजै।
अब दुःख दूर निवारो स्वामी,कौल करूँ प्रभु अन्तरयामी।
बाहर निकारो आदि सनेही, बहु दुःख पावै मेरी देही।
मैं जन प्रभुको दास कहाऊँ, आन देव के निकट न जाऊँ।
सतगुरूका होय रहों मैं चेरा, दम दम नाम उचारूँ तेरा।
नित उठ गुरू चरणामृत लेऊँ,तन मन धनै निछावर देऊँ।
जो मैं तन सों करूँ कमाई, अर्धमाल मैं गुरूहि चढाई।
कुबुद्धि सीख काहू नहिं मानूं,हराम माल जहर करिजानूं।
कुलकी त्यागूँ मान बडाई, निर्मल ज्ञान एक संत सगाई।।
रात दिवस ऐसे लव लाऊँ,करत फुरत भक्ति गुरू कराऊँ।
दुःख सुख परे सो तनसे सहूँ, भक्ति द्दढै गुरू चरणै रहू।
यहां कोई मित्रा नहिं भाई, मातु पिता नहिं लोग लुगाई।
देवी देव की कछू न चालै, गुरू बिन कौन करै प्रतिपालै।
अब तो खबर परी यहि ठाहीं, और कोईकी चालै नाहीं।
पिछली बात मैं हृदय जानी,कोई काहूका नहीं रे प्राणी।
मद माया में जीव भरमाया। सो तो कोई काम न आया।
बहुत विचार किया मैं सोई, अन्तकाल अपनो नहिं कोई।
ऐसी करूणा करै विचारा, दया करो दुःख भंजर हारा।
तीनलोक जीव काल सतावै,ब्रह्मा विष्णु शिवपार न पावै।
सत्यपुरुष तब मोहीं पठावा, जीव उबारन मैं जग आवा।
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#कबीर