Mahendra Narayan
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7 days ago
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पत्थर ने पैदा किए , फूलों के संसार । सजा जिसे दरबार में , बने स्वयं मीनार । बने स्वयं मीनार , सजाते महल आज भी। दिखते हैं साकार , करें ज्यों लगे राज भी ॥ गाली खाते आज, नाम पर अपने अक्सर। फूल बने हैं प्रेम , नफरतों के हैं पत्थर ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #कविता #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺