यह भगवान कृष्ण को समर्पित एक शक्तिशाली भक्ति मंत्र है।
उत्पत्ति: यह पुराणों और श्रीमद्भागवत की भक्ति परंपरा से निकला है।
इतिहास: * यह मंत्र "कृष्ण" तत्व को प्रणाम करने के लिए है। कृष्ण का अर्थ है "जो अपनी ओर आकर्षित करे" (कर्षक)।
ऐतिहासिक रूप से, द्वापर युग में कृष्ण के अवतार के बाद, उनके भक्तों ने उनकी दिव्यता को नमन करने के लिए इस मंत्र का उपयोग किया।
वैष्णव धर्म में इस मंत्र का जाप हृदय की शुद्धि और कृष्ण के प्रति प्रेम (भक्ति) जगाने के लिए किया जाता है।
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