122 122 122 122
सभी ख्वाहिशे अब दुआ से कहेंगे
गुजारिश करेंगे , खुदा से कहेंगे
लिखा क्यों नसीबो में ये जख्म मेरे
छुपा आँसुओ को अदा से कहेंगे
बढ़ी जा रही दिल की बैचेनियाँ ये
बदलती हुई इस फिजा से कहेंगे
अगर रुक सके तो कभी रोक लेना
दिलो को जलाती हवा से कहेंगे
नही और कुछ पास बाकी रहा है
बहारों में बिखरी खिजा से कहेंगे
ये घुप अंधेरे मार डालेंगे हमको
रहम कर जरा अब निशा से कहेंगे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
19/1/2018
#📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️