2122 2122 2122
ख्वाब आँखों में सजाना चाहता है
आज फिर दिल गुनगुनाना चाहता है
रह गये जज्बात दिल के जो अधूरे
वो ग़ज़ल गा कर सुनाना चाहता है
है मेरे अहसास में शामिल तु अब भी
राज दिल का ये बताना चाहता है
खाके झूठी कस्मे कर के झूठे वादे
आज फिर हमको हसाना चाहता है
सोई है जो हसरते दिल में तेरे भी
प्यार से अपने जगाना चाहता है
कर यकीं इस बार अपने आशिक पे
वादे सब अपने निभाना चाहता है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
23/12/2016
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