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मेरी कलम
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2122 2122 2122 खो दिया है जिसको पाना चाहता हूँ फिर गले उस को लगाना चाहता हूँ रात उतरा शाख पर जो फूल मेरी अपने आँगन में सजाना चाहता हूँ बस गई है जो महक अहसास में वो फिर से पा कर मुस्कराना चाहता हूँ वो तेरा इतराना , रातों को मचलना उन लबो का वो तराना चाहता हूँ जो चमन वीराँ है बिन खुश्बू के तेरी उस चमन को फिर बसाना चाहता हूँ शाखजो जख्मी है बिन गुलाब के अब फूल फिर उस पे खिलाना चाहता हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 31/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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