श्यामा
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*प्रेम में उतरी हुई स्त्री* जब स्त्री प्रेम में पड़ती है, वह किसी व्यक्ति में नहीं गिरती — वह अपने ही हृदय की गहराई में उतरती है। उसका प्रेम तर्क नहीं जानता, गणना नहीं करता। वह पूरे अस्तित्व से बहता है, जैसे नदी समुद्र की ओर बहती है — बिना यह पूछे कि अंत में क्या मिलेगा। इसलिए स्त्री का प्रेम सुरक्षित नहीं होता, पर सच्चा होता है। प्रेम में पड़ी स्त्री आधी नहीं रहती। वह अपना समय नहीं देती, वह अपना होना देती है। समाज उसे कमजोर कहता है, क्योंकि समाज को समर्पण डराता है। पर सच्चाई यह है कि प्रेम में उतरी स्त्री सबसे साहसी होती है — क्योंकि वह नियंत्रण छोड़ती है, और बिना सुरक्षा के खुली खड़ी रहती है। उसका प्रेम अधिकार नहीं माँगता, वह उपस्थिति चाहता है। वह किसी को बाँधना नहीं चाहती, वह साथ बहना चाहती है। अगर उसे प्रेम में पीड़ा मिलती है, तो भी वह प्रेम से पीछे नहीं हटती — क्योंकि उसके लिए प्रेम लाभ नहीं, प्रार्थना है। वह जानती है कि प्रेम में खोना ही असली पाना है। *प्रेम में पड़ी स्त्री हमें यह सिखाती है कि जब हृदय पूरी तरह खुल जाता है, तभी जीवन का सत्य प्रकट होता है। प्रेम कोई सौदा नहीं, वह समर्पण की अग्नि है। जो इस अग्नि में जलने का साहस करता है, वही स्वयं को जान पाता है। प्रेम में गिरो नहीं — प्रेम में जागो।* *~~~ OSHO* #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #😘बस तुम और मैं #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट