MD sharfuddin
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27 days ago
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क़ुरआन मजीद के बारे में अत्यंत हैरान कर देने वाली जानकारी ए-आई ने जब क़ुरआन के विशाल डेटा बेस को अपने प्रोसेसरों में खंगाला, तो उसे मालूम हुआ कि यह किताब सिर्फ़ जुमलों का मजमूआ नहीं है, बल्कि यह रियाज़ी का एक ऐसा “सुपर कोड” है जिसे लिखना तो दूर की बात, आज के सुपर कम्प्यूटरों के लिए उसका तसव्वुर करना भी मुश्किल है। ए-आई ने एक ऐसी मंतिक पेश की जो किसी भी शक करने वाले के दिमाग़ को हैरत में डाल सकती है: “अगर कोई इंसान एक किताब लिखे, तो वह उसके मायने पर तो ध्यान दे सकता है, लेकिन वह कभी यह कंट्रोल नहीं कर सकता कि पूरी किताब में मुतज़ाद अल्फ़ाज़ की तादाद एक-दूसरे के बिल्कुल बराबर रहे।” ए-आई ने क़ुरआन के “लफ़्ज़ी तवाज़ुन” (Word Balance) के हैरान कर देने वाले आंकड़े पेश किए। उसने देखा कि पूरे क़ुरआन में लफ़्ज़ “दुनिया” ठीक 115 बार आया है, और उसके मुक़ाबिल लफ़्ज़ “आख़िरत” भी 115 बार ही आया है। इसी तरह लफ़्ज़ “मलाइका” (फ़रिश्ते) 88 बार और “शयातीन” भी 88 बार। लफ़्ज़ “हयात” (ज़िंदगी) 145 बार और “मौत” भी 145 बार। आगे चलकर और भी मिसालें सामने आईं: नफ़ा (फ़ायदा) 50 बार — फ़साद (नुक़सान) 50 बार ईमान 25 बार — कुफ़्र 25 बार सालिहात (नेक काम) 167 — सय्यिआत (बुरे काम) 167 इब्लीस 11 बार — इस्तिआज़ा 11 बार ए-आई ने कहा कि यह रियाज़ी हमआहंगी इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि यह कलाम किसी ऐसी हस्ती का है जो तमाम मुतज़ाद क़ुव्वतों पर पूरा कंट्रोल रखती है। फिर ए-आई ने क़ायनाती हक़ीक़तों की तरफ़ देखा। क़ुरआन में “बहर” (समुद्र/पानी) 32 बार और “बर्र” (ज़मीन) 13 बार आया। 32 + 13 = 45 32 ÷ 45 = 71.11% 13 ÷ 45 = 28.89% आज की साइंस भी बताती है कि ज़मीन पर पानी और ज़मीन का अनुपात लगभग यही है। समय के बारे में: शहर (महीना) 12 बार यौम (दिन) 365 बार अय्याम 30 बार क़ुरआन में कुल 114 सूरतें हैं। इनमें से 57 सूरतों का नंबर + आयत = जुफ़्त और 57 का = ताक इसी तरह: जिन सूरतों की आयतें उनके नंबर से ज़्यादा हैं = 57 जिनकी कम हैं = 57 यह पूरा तवाज़ुन सिर्फ़ इत्तिफ़ाक़ नहीं लगता। संख्या 19 का निज़ाम क़ुरआन में 19 को खास अहमियत दी गई है। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम इसमें 19 हरफ़ हैं। “इस्म” = 19 “अल्लाह” = 2698 (19 × 142) “रहमान” = 57 (19 × 3) “रहीम” = 114 (19 × 6) कुल सूरतें = 114 = 19 × 6 पहली वही (सूरह अल-अलक की 5 आयतें) उनके शब्द = 19 सूरह अल-अलक की आयतें = 19 आख़िर से गिनें तो = 19वीं हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत में भी तवाज़ुन बताया जाता है, जैसे सूरह क़ाफ़ में क़ = 57 सूरह शूरा में क़ = 57 दोनों = 114 सूरह क़लम में नून = 133 = 19 × 7 सूरह मुद्दस्सिर में आयत: “अलैहा तिसअता अशर” (उस पर 19 हैं) सूरह कौसर का उदाहरण तीन आयतें हर आयत में 10 हरफ़ (दावा किया जाता है) आख़िर में “र” अरबी में “र” दसवाँ हरफ़ क़ुरबानी = 10 ज़िलहिज्जा नतीजा (दावे के अनुसार) इन सब को देखकर कुछ लोग कहते हैं कि क़ुरआन एक “डिजिटल सिग्नेचर” की तरह है, जिसका हर लफ़्ज़ नपा-तुला है। ⚠️ महत्वपूर्ण टिप्पणी: ऊपर लिखी गई बहुत-सी बातें इंटरनेट और किताबों में मशहूर दावों पर आधारित हैं। इन में से कई दावों पर इस्लामी विद्वानों और शोधकर्ताओं में मतभेद है, और सभी गणनाएँ सर्वसम्मति से सिद्ध नहीं मानी जातीं। इसलिए इन्हें आस्था से जुड़ी व्याख्या या रोचक दावे समझा जाता है, न कि सभी को प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य। #namaz #hadis #Quran #🐦Bird लवर #💪विंटर एक्सरसाइज टिप्स 🏋️‍♀️ #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #नीला आसमान 🌌 #🌼 मेरा बगीचा 🌸 @💖💖💖chandni💖💖💖 @💫farha khan..🌹 @Nisha 🌟 @☝️अल्लाह 🤲 कि बन्दी S.🌹 अल्हम्दुलिलल्लाह 🤲 😊 @sk__MAJID