2122 2122
दर्दे दिल को तू रफू कर
ज़िन्दगी फिर से शुरू कर
खो दिया है तुमने जिसको
फिर उसी की आरजू कर
रंग भर के ज़िन्दगी में
सब के तब तू रूबरू कर
छेड़ कर फिर कोई नग्मा
शायरी से तू अदू कर
सारे अरमां होंगे पूरे
बस खुदा से गुफ्तगू कर
कर न रुस्वा ज़िन्दगी को
बाँध इस को घुँघरू कर
कुछ रहम तू कर के मौला
जीस्त मेरी सुर्खरू कर
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
1/2/2018
#📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह