sn vyas
1.3K views
1 months ago
प्रभु श्री राम से सागर अपना दर्द कह रहा है कि हे भगवन ठीक है आपने क्रोध की लीला करके मुझे सीख दी है परंतु मैं जिस मर्यादा में बंधा था वो भी तो आपकी ही बनाई हुई है, हे प्रभ मैं जानता हूँ आप नरलीला कर रहे हैं और मनुष्य वाला ही व्यवहार कर रहे हैं इसीलिए जैसे समाज में सीधे, सच्चा,सेवा करने वाले सदा तरिस्कृत होते हैं(जैसे ढोल, गंवार,शुद्र,पशु व नारी), उनको उनकी सेवा के बदले धन्यवाद की बजाय सदा कष्ट दिया जाता है वैसा ही व्यवहार आपने नरलीला में मेरे साथ किया है, मैं जानता हूँ यह आपका स्वभाव नही है, आप तो दीनदयाल हैं प्रभु, ये अब आप नरलीला कर रहे हो। जय श्री राम ##सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩