जहाँ शुभ सोच होती है, वहाँ अशुभ ठहर ही नहीं सकता। क्योंकि सोच सिर्फ विचार नहीं होती, वह एक ऊर्जा होती है। जैसी सोच, वैसा वातावरण। जब मन में शुभ संकल्प चलते हैं, तब परिस्थितियाँ अपने आप हल्की होने लगती हैं। नकारात्मकता बाहर से आती है, लेकिन उसे टिकने की जगह हम अपनी सोच से ही देते हैं। जिस दिन हमने अपने विचारों को साफ़, स्थिर और सकारात्मक रखना सीख लिया, उसी दिन समझ में आ जाता है कि अशुभ कोई शक्ति नहीं है, वह सिर्फ शुभ की अनुपस्थिति है। शुभ सोच को जागृत रखिए, क्योंकि वही आपके जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा कवच है।
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