सुशील मेहता
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1 days ago
आंटिज्म डिसओडर प्रतिवर्ष 2 अप्रैल विश्व स्तर पर ऑटिज्म / आत्मकेंद्रित जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व केंद्रित जागरूकता दिवस 1 नवंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र संघ परिषद द्वारा पारित किया गया था और 18 दिसंबर 2007 को इसे लागू कर दिया गया विकिपीडियाऑटिज्म (Autism) एक आजीवन न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो लिंग, जाति या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बावजूद बचपन में हो जाती है. यानी यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो विकास से सम्बंधित विकार है, जिसके लक्षण जन्म से या बाल्यावस्था यानी प्रथम तीन वर्षों में ही नज़र आने लगते है। इस बिमारी से पीड़ित व्यक्ति मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है. - इन रोगियों को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं. - ऐसा भी देखा गया है कि इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को सुनने और बोलने में दिक्कत हो सकती है. - इस बिमारी को ऑटिस्टिक डिस्ऑगर्डर के नाम से भी जाना जाता है, यह तब बोलते है जब बिमारी काफी गंभीर रूप ले चुकी हो. परन्तु जब यह बिमारी ज्यादा प्रभावी ना हो तो इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस्ऑ र्डर (ASD) के नाम से बुलाते है। ऑटिज्म बिमारी पूरी दुनिया में फैली हुई है. यहां तक कि कैंसर, एड्स और मधुमेह के रोगियों की संख्या को मिलाकर भी ऑटिज्म रोगियों की संख्या ज्यादा है. इनमें डाउन सिंड्रोम की संख्या अपेक्षा से भी अधिक है. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर में प्रति दस हज़ार में से 20 व्यक्ति इस रोग से प्रभावित होते हैं. तो आइये मिलकर इस बिमारी के बारे में लोगो को जागरूक करते है। । #जागरूकता दिवस