जागरूकता दिवस

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सुशील मेहता
696 views 21 days ago
राष्ट्रीय समुद्री दिवस भारत में हर साल पांच अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है. यह दिन अंतरमहाद्वीपीय वाणिज्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था के समर्थन में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के लिए मनाया जाता है. इसके साथ भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना भी इसका उद्देश्य है। पहली बार 5 अप्रैल, 1919 के दिन सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लि. का पहला स्टीम शिप एसएस लॉयल्टी मुंबई से लंदन की पहली समुद्री यात्रा के लिए अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उतारा गया था. यह कदम भारतीय नौवहन इतिहास के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि उस दौरान समुद्री मार्गों को अंग्रेजों द्वारा नियंत्रित किया जाता था.मर्चेंट नेवी वीक का आयोजन 31 मार्च से 05 अप्रैल, 2021 तक राजभवन मुंबई में किया गया है. एक से तीन अप्रैल तक वेबिनार का भी आयोजन किया गया. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना है. #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
608 views 15 days ago
राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस महिलाएं किसी भी समाज की मजबूत स्तंभ होती हैं। जब हम महिलाओं और बच्चों की समग्र देखभाल करेंगे तभी देश का सतत विकास संभव है। एक गर्भवती महिला के निधन से ना केवल बच्चों से माँ का आंचल छिन जाता है बल्कि पूरा का पूरा परिवार ही बिखर जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की उचित देखभाल और प्रसव संबंधी जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल की तरह 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया गया। 11 अप्रैल को कस्तूरबा गांधी के जन्म की सालगिरह को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में घोषित किया गया है । आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस घोषित करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। इस दिन देश भर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ताकि गर्भवती महिलाओं के पोषण पर सही ध्यान दिया जा सके।भारत में हर साल जन्म देते समय तकरीबन 45000 महिलाएं प्रसव के दौरान अपनी जान गंवा देती हैं। देश में जन्म देते समय प्रति 100,000 महिलाओं में से 167 महिलाएं मौंत के मुंह में चली जाती हैं। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के मुताबिक भारत में मातृ मृत्‍यु दर में तेजी से कमी आ रही है। वर्ष 2010-12 में मातृ मृत्यु दर 178, 2007-2009 में 212 जबकि 2004-2006 में मातृ मृत्यु दर 254 रही। देश ने 1990 से 2011-13 की अवधि में 47 प्रतिशत की वैश्विक उपलब्धि की तुलना में मातृ मृत्‍यु दर को 65 प्रतिशत से ज्‍यादा घटाने में सफलता हासिल की है। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
524 views 5 days ago
विश्व रचनात्मक व नवाचार दिवस हर साल 21 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व रचनात्मकता और नवाचार दिवस (World Creativity and Innovation Day) मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवाचार और रचनात्मकता के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करता है। इस दिवस का उद्देश्‍य विश्‍व भर में रचनात्‍मकता की संसकृति को बनाए रखना है। विश्‍व समुदाय का मानना है कि रचनात्‍मकता ही विश्‍व की सबसे अनमोल निधि है। जिसके सहारे हम अपनी सतत विकास की रफ्तार को बनाए रख सकते हैं। हिंसा और वैमनस्‍य के दौर में रचनात्‍मकता ही है जो विश्‍व को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है। इस रचनात्‍मकता की शुरूआत घर से ही होती है। होनी भी चाहिए। मिट्टी, रंग, कपड़ा, कागज, पेड़ …. वह कुछ भी जिसे हम आप देख सकते हैं, छू सकते हैं रचनात्‍मकता के सांचे में ढल कर और सुंदर हो जाता है। सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि बच्‍चों में यह रचनात्‍मकता बनी रहे। इसके लिए आप इन टिप्‍स को फॉलो कर सकते हैं।बच्चे के रचनात्मक विकास के लिए ज़रूरी है कि अपने मन का काम करते समय उसे टोका न जाए और न ही गाइड किया जाए। टोका-टाकी और ज़्यादा सुझाव उसकी कल्पनाशक्ति को प्रभावित करते हैं। किसी भी बच्‍चे के सतत विकास के लिए रचनात्‍मकता का होना बहुत जरूरी है। इसे इस तरह भी कहा जा सकता है कि बच्‍चे की रचनात्‍मकता ही उसके विकास का संकेत देती है। शारीरिक और मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ बच्‍चे ही इसमें बेहतर योगदान कर सकते हैं। पर कई बार पेरेंट्स और टीचर्स की गलती से बच्‍चों की यह रचनात्‍मकता बाधित होती है। बच्चे के रचनात्मक विकास के लिए ज़रूरी है कि अपने मन का काम करते समय उसे टोका न जाए और न ही गाइड किया जाए। टोका-टाकी और ज़्यादा सुझाव उसकी कल्पनाशक्ति को प्रभावित करते हैं। आपकी भूमिका बच्चे को सिर्फ़ सामान ख़रीदकर देने तक होनी चाहिए। अगर उसे ड्रॉइंग करने में मज़ा आता है तो पेंसिल-रबर, ड्रॉइंग बुक, स्केचपैन, पेंसिल कलर, आदि उसे ख़रीद कर दें। लिखने में रुचि है तो अच्छी किताबें ला कर दें। वह जो करना चाहता है उसे करने दें। जब हम बच्‍चों को बहुत ज्‍यादा गाइड करने लगते हैं तो अनजाने ही हम उसकी रचनात्‍मकता का रास्‍ता रोक देते हैं। #जागरूकता दिवस
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