जागरूकता दिवस

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सुशील मेहता
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हिरोशिमा दिवस: 6 अगस्त, 1945 को, अमेरिका ने सुबह लगभग 8:15 बजे जापानी शहर हिरोशिमा पर परमाणु हथियार, 'लिटिल बॉय' गिराया, तब से, इस दिन को हजारों मौतों पर शोक मनाने और श्रद्धांजलि देने के अवसर के रूप में मनाया जाता है।6 अग॰ 2023) '6 अगस्त' को कहा जाता है। अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 के दिन जापान के हिरोशिमा नगर पर ‘लिटिल बॉय’ नामक यूरेनियम बम गिराया था। इस बम के प्रभाव से 13 वर्ग कि.मी. में तबाही मच गयी थी। हिरोशिमा की 3.5 लाख की आबादी में से एक लाख चालीस हज़ार लोग एक झटके में ही मारे गए। ये सब सैनिक नहीं थे। इनमें से अधिकांश साधारण नागरिक, बच्चे, बूढ़े तथा स्त्रियाँ थीं। इसके बाद भी अनेक वर्षों तक अनगिनत लोग विकिरण के प्रभाव से मरते रहे। अमरीका इतने पर ही नहीं रुका। उसे एक अन्य प्रकार के बम के प्रभावों को अभी और आज़माना था। इसलिए इस अमानवीय विनाश के तीन दिन बाद ही 9 अगस्त को ‘फ़ैट मैन’ नामक प्लूटोनियम बम नागासाकी पर गिराया गया, जिसमें अनुमानित 74 हज़ार लोग विस्फोट व गर्मी के कारण मारे गए। इनमें भी अधिकांश निरीह नागरिक थे।हिरोशिमा को 6 अगस्त, 1945 तक जापान के एक औद्योगिक नगर के रूप में जाना जाता था। दूसरे विश्वयुद्ध के समय जापानी सेना की 5वीं डिविजन का यहाँ मुख्यालय था। यहाँ सैनिक छावनी भी थी और यह सैनिक आपूर्ति मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 6 अगस्त से पूर्व इस नगर पर अमरीका ने बमबारी नहीं की थी, ताकि अणुबम से होने वाले नुकसान का सटीक आकलन किया जा सके। विश्व में पहली बार 6 अगस्त, 1945 को जब इस शहर पर 'लिटिल बॉय' नाम का अणुबम गिराया गया, तब जापान सरकार के राशन आपूर्ति के आँकड़ों के अनुसार शहर में कुलआबादी 2,55,000 थी। लेकिन इस शहर में लगातार सैनिक और सहायक मजदूर आ-जा रहे थे। गैर आधिकारिक आंकडों के अनुसार नगर की तत्कालीन आबादी 3,81,000 के आस-पास थी। कमाण्डर कर्नल पॉल टिबेट्स की कमान में 6 अगस्त को अमरीकी सेना के विमान एनोला गे (बी-29) ने दक्षिण प्रशान्त के वायु सैनिक अड्डे 'टिनियन' से दो अन्य बी-29 विमानों के साथ उड़ान भरी। विमान का नाम 'एनोला गे' उसके पायलट पॉल टिबेट्स की माँ के नाम पर रखा गया था। साथ उड़ान भरने वाले विमानों में एक का नाम था- 'ग्रेट आर्टिस्ट'। अणुबम का प्रभाव नापने वाले यंत्रों-उपकरणों से सज्जित इस विमान को मेजर चार्ल्स स्वीनी उड़ा रहे थे। दूसरे अनाम विमान, बाद में जिसका नाम 'नेसेसरी इविल' रखा गया, में दुनिया को अणुबम की संहारक क्षमता और अमरीकी शक्ति के प्रमाण जुटाने के लिये उच्च क्षमता के कैमरे लगेहुए थे, इसके पायलट थे कैप्टन जॉर्ज मैक्वार्ड। टिनियन से उड़ान भरने के बाद तीनों विमानों ने इवोजिमा होते हुए जापान की वायुसीमा में प्रवेश किया। उस वक्त विमान 8,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहे थे। हिरोशिमा के पास पहुँच कर विमान की ऊँचाई 32,300 फीट हो गयी। उड़ान के दौरान जलसेना के कैप्टन विलियम पार्सन्स ने विमान में 'लिटिल बॉय' को फिट किया और लक्ष्य पर पहुँचने के 30 मिनिट पूर्व उनके सहायक सेकेण्ड लेफ्टिनेंट टेनेण्ट मॉरिस जैप्सन ने उस अणुबम पर लगे सुरक्षा उपकरणों को हटाकर उसे सक्रिय किया।जापान के चेतावनी राडार ने हमले के लगभग एक घण्टे पूर्व दक्षिण जापान की ओर बढ़ रहे इन अमरीकी विमानों को चिह्नित करके सम्भावित हवाई हमले की रेडियो से चेतावनी दे दी थी। सुबह लगभग 8 बजे हिरोशिमा के राडार चालक ने देखा कि विमानों की संख्या केवल तीन ही है, इसलिये उसने माना कि यह टोही विमान हैं और कोई हमला नहीं होने जा रहा। अपने ईंधन और हवाई जहाजों को बचाने की दृष्टि से जापानी वायुसेना ने अमरीकी जहाजों पर प्रतिरोधी हवाई आक्रमण नहीं किया। अगर जापान के राडार पहचान लेते कि ये बमवर्षक विमान हैं तो शायद अधिक गम्भीर प्रयास किये जाते। लक्ष्य पर स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:15 पर बम फैंका गया।17 अगस्त या 18 अगस्त को जापान पर तीसरा अणु हमला होना था। इसी क्रम से सितम्बर में तीन और अक्टूबर में 3 हमले करने की भी योजना थी। उधर जापान के सम्राट स्थिति को तुरन्त काबू में करना चाहते थे, जबकि सोवियत संघ ने भी जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। अन्तत: जापान ने 14 अगस्त को समर्पण कर दिया। इस प्रकार जापान के समर्पण के साथ ही विश्व इतिहास के सर्वाधिक निर्मम आक्रमण और सर्वाधिक संहारक अस्त्र के परीक्षण का पटाक्षेप हुआ। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
1K views 5 days ago
हर साल 1 अगस्त को मनाया जाता है और यह 2012 से उसी तारीख को मनाया जाता है। यह पहली बार इसलिए मनाया गया था कि इस घातक बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस पर और अधिक शोध करने के लिए उत्साह पैदा किया जा सके, ताकि इस बीमारी के आसपास की असमर्थता को दूर किया जा सके। विश्व फेफड़ों के कैंसर दिवस 2023 के लिए थीम का  अभी तय नहीं किया गया है। विश्व लंग कैंसर दिवस का अभियान 2012 में शुरू किया गया था, यद्यपि पहले कुछ वर्षों में उसकी मांग बढ़ी थी। इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटिज़ के मंच ने इस अभियान का आयोजन किया था, जो अंतर्राष्ट्रीय फेफड़ों के अध्ययन संघ और अमेरिकी चेस्ट चिकित्सा कॉलेज के साथ सहयोग में हुआ था। तब से फेफड़ों के कैंसर के बारे में जागरूकता में तेजी से वृद्धि हुई है और लोग फेफड़ों के कैंसर के संकेतों और लक्षणों के बारे में अधिक जागरूक हुए हैं। कैंसर की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है। यह दिन हमें इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और जल्द से जल्द पहचान और उपचार की महत्वता को समझाने में मदद करता है। लंग कैंसर को एक अत्यंत घातक कैंसर के रूप में पहचाना जाता है और मेयो क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, लंग कैंसर उस समय शुरू होता है जब फेफड़ों में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, और जिन लोगों की सिगरेट पीने की आदत है, उन्हें लंग कैंसर होने का अधिक खतरा होता है, लेकिन इससे प्रभावित होने का संभावना उन लोगों के लिए भी होती है जिन्होंने कभी भी सिगरेट नहीं पी। लंग कैंसर के होने वाले लोगों में से अधिकतर 80% लोग अक्सर सिगरेट पीते हैं। दूसरे हाथ की धूम्रपान, रेडन, वायु प्रदूषण और परिवार का लंग कैंसर के इतिहास से भी कैंसर के होने के कारण हो सकते हैं और इसमें दिखाई देने वाले लक्षण शामिल हैं: स्थायी खांसी, सांस लेने में परेशानी, खूनी खांसी, सीने में दर्द और थकान। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
577 views 7 days ago
मानव तस्करी के खिलाफ 'विश्व दिवस' (World Day Against Trafficking in Persons) हर साल 30 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2013 में मानव तस्करी पीड़ितों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए की गई थी। दुनिया भर में संगठित आपराधिक नेटवर्क द्वारा किए जाने वाले इस मानवाधिकार उल्लंघन को रोकना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है।वैश्विक प्रभाव: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, मानव तस्करी लगभग $236 बिलियन का वैश्विक उद्योग है, जिसमें लगभग 2 करोड़ 80 लाख लोग इसके शिकार हैं।संयुक्त राष्ट्र की पहल: संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध कार्यालय (UNODC) और संयुक्त राष्ट्र इसके खिलाफ सीमा पार सहयोग और बचाव अभियानों को मजबूत करने के लिए कार्य करते हैं। "घोटाले के जाल में फँसे" मानव तस्करी के एक तेज़ी से फैलते रूप की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध समूह बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए लोगों का शोषण करते हैं। पीड़ितों को जबरन अपराध करने के लिए तस्करी किया जाता है और उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी के अभियानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। शोषण का यह रूप साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है, जो संगठित अपराध की बढ़ती परस्पर संबद्धता को दर्शाता है। नौकरी के विज्ञापनों के जरिए पीड़ितों को भर्ती करते हैं, जिनमें विदेश में वैध रोजगार के अवसरों का वादा किया जाता है। असली नौकरी मिलने की उम्मीद में पीड़ित दूसरे देश की यात्रा करते हैं, लेकिन वहां उन्हें अवैध धोखाधड़ी वाले ठिकानों में कैद कर दिया जाता है। इन परिसरों के भीतर, पीड़ितों को साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसमें प्रेम-प्रसंग धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी और दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाने वाली अन्य ऑनलाइन योजनाएं शामिल हैं। उन्हें लगातार निगरानी में रखा जाता है और हिंसा, धमकियों, कर्ज के बंधन और अत्यधिक काम के दबाव का शिकार बनाया जाता है, जिससे वे भय के माहौल में फंस जाते हैं और उनके पास भागने का बहुत कम अवसर होता है। चूंकि ये अपराध अक्सर कई देशों में फैले होते हैं, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2024 में अपनाई गई साइबर अपराध विरोधी संयुक्त राष्ट्र संधि , डिजिटल अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और प्रौद्योगिकी-आधारित संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नया वैश्विक ढांचा प्रदान करती है। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से सहयोग करने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अधिक सुसंगत तरीके से एकत्र करने और साझा करने का समर्थन करता है, जिससे अधिकारियों को सीमाओं के पार संचालित आपराधिक नेटवर्क की जांच करने और उन्हें नष्ट करने में मदद मिलती है। #जागरूकता दिवस
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