सुशील मेहता
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सुशील मेहता
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मैं अवकाश प्राप्त डाक्टर हूँ
शेर शाहिद मीर #✒ शायरी
✒ शायरी - "दोहा" काग़ज़ पर लिख दीजिए अपने सारे भेद दिल में रहे तो आँच से हो जाएँगे ಅ೯ (शाहिद मीर) @myquote "दोहा" काग़ज़ पर लिख दीजिए अपने सारे भेद दिल में रहे तो आँच से हो जाएँगे ಅ೯ (शाहिद मीर) @myquote - ShareChat
हजरत अली जन्म दिन अली इब्रे अबी तालिब या फिर जिन्हें ‘हजरत अली’ के नाम से भी जाना जाता है, ईस्लामिक कैलैंडर के अनुसार उनका जन्म 13 रजब 24 हिजरी पूर्व को और ग्रोगेरियन कैलेंडर के अनुसार 17 मार्च 600 ईस्वी को हुआ था। वह इस्लाम के पैंगबर मोहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद थे, वर्तमान समय में वह लोगो के बीच हजरत अली के नाम से प्रसिद्ध हैं।उन्होंने 656 ईस्वी से लेकर 661 ईस्वी तक इस्लामिक साम्राज्य के चौथे खलीफा के रुप में शासन किया और शिया इस्लाम के अनुसार वह 632 से 661 तक पहले इमाम के रुप में भी कार्यरत रहे। उनके याद में भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में उनके जन्मदिन के इस पर्व को काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। आज से करीब 1307 साल पहले यानि कि 660 ईस्वी में रमजान महीने की 30वी तारीख को कुफी की मस्जिद में सुबह की नमाज के दौरान हजरत अली की हत्या की गई थी उसके बावजूद उन्होंने अपने कातिल को माफ करने की बात कही। कहा जाता है कि हजरत अली अपने कातिल को जानते थे उसके बावजूद उन्होंने सुबह की नमाज के लिए उसे उठाया था और नमाज में शामिल किया था। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - W@r 3 January 2026 Cம்# Saturday الویلعال یتبفا Hazarat Ali thday Oirt May continue to seek blessings from we Hazrat Ali and have a blessed life W@r 3 January 2026 Cம்# Saturday الویلعال یتبفا Hazarat Ali thday Oirt May continue to seek blessings from we Hazrat Ali and have a blessed life - ShareChat
माता शाकम्भरी जयंती शाकंभरी देवी जयंती हिन्दू धर्म के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह पौष पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है इस दिन माँ आदिशक्ति जगदम्बा ने शाकंभरी देवी के रूप में सौम्य अवतार लिया था। ऐसा माना जाता है कि देवी भगवती ने अकाल और पृथ्वी पर गंभीर खाद्य संकट को कम करने के लिए शाकंभरी के रूप में अवतार लिया था। जैसा कि उनके नाम से ज्ञात होता है जिसका अर्थ है - ‘शाक’ जिसका अर्थ है ‘सब्जी व शाकाहारी भोजन’ और ‘भारी’ का अर्थ है ‘धारक’। इसलिए सब्जियों, फलों और हरी पत्तियों की देवी के रूप में भी जाना जाता है और उन्हें फलों और सब्जियों के हरे परिवेश के साथ चित्रित किया जाता है। शाकंभरी देवी को चार भुजाओं और कही पर अष्टभुजाओं वाली के रुप में भी दर्शाया गया है। माँ शाकम्भरी को ही रक्तदंतिका, छिन्नमस्तिका, भीमादेवी, भ्रामरी और श्री कनकदुर्गा कहा जाता है। माँ श्री शाकंभरी के देश मे अनेक पीठ है। लेकिन शक्तिपीठ केवल एक ही है जो सहारनपुर के पर्वतीय भाग मे है यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले मंदिरों मे से एक है और उत्तर भारत मे वैष्णो देवी के बाद दूसरा सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। उत्तर भारत की नौ देवियों मे शाकम्भरी देवी का नौंवा और अंतिम दर्शन माना जाता है। नौ देवियों मे माँ शाकम्भरी देवी का स्वरूप सर्वाधिक करूणामय और ममतामयी माँ का है।शाकंभरी देवी के अवतार की कथा देवी पुराण, शिव पुराण और धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार हिरण्याक्ष के वंश मे एक महादैत्य रूरु था। रूरु का एक पुत्र था जिसका नाम दुर्गमासुर था। दुर्गमासुर ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके चारों वेदों को अपने अधीन कर लिया। वेदों के ना रहने से समस्त क्रियाएँ लुप्त हो गयी। ब्राह्मणों ने अपना धर्म त्याग कर दिया। चौतरफा हाहाकार मच गया। ब्राह्मणों के धर्म विहीन होने से यज्ञादि अनुष्ठान बंद हो गये और देवताओं की शक्ति भी क्षीण होने लगी। जिसके कारण एक भयंकर अकाल पड़ा। किसी भी प्राणी को जल नही मिला रहा था। जल के अभाव मे वनस्पति भी सूख गयी, जिसके काराण भूख और प्यास से समस्त जीव मरने लगे। दुर्गमासुर की देवों से भयंकर लडाई हुई जिसमें देवताओं की हार हुई अतः दुर्गमासुर के अत्याचारों से पीड़ित देवतागण शिवालिक पर्वतमालाओं में छिप गये तथा जगदम्बा का ध्यान, जप, पुजन और स्तुति करने लगे । उनके द्वारा जगदम्बा की स्तुति करने पर महामाया माँ पार्वती जो महेशानी, भुवनेश्वरि नामों से प्रसिद्ध है आयोनिजा रूप मे सहारनपुर शक्ति पीठ स्थल पर प्रकट हुई। समस्त सृष्टि की दुर्दशा देख जगदम्बा को बहुत दुख हुआ और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा प्रवाहित होने लगी। आंसुओं की धारा से सभी नदियां व तालाब पानी से भर गये। देवताओं ने उस समय माँ की शताक्षी देवी नाम से आराधना की। शताक्षी देवी ने एक दिव्य सौम्य स्वरूप धारण किया। चतुर्भुजी माँ कमलासन पर विराजमान थी। अपने हाथों मे कमल, बाण, शाक- फल और एक तेजस्वी धनुष धारण किये हुए थी। भगवती परमेश्वरी ने अपने शरीर से अनेकों शाक प्रकट किये। जिनको खाकर संसार की क्षुधा शांत हुई। माता ने पहाड़ पर दृष्टि डाली तो सर्वप्रथम सराल नामक कंदमूल की उत्पत्ति हुई । इसी दिव्य रूप में माँ शाकम्भरी देवी के नाम से पूजित हुई।तत्पश्चात् वह दुर्गमासुर को रिझाने के लिये सुंदर रूप धारण कर शिवालिक पहाड़ी पर आसन लगाकर बैठ गयीं। जब असुरों ने पहाड़ी पर बैठी जगदम्बा को देखा तो उनकों पकडने के विचार से आये। स्वयं दुर्गमासुर भी आया तब देवी ने पृथ्वी और स्वर्ग के बाहर एक घेरा बना दिया और स्वयं उसके बाहर खडी हो गयी। दुर्गमासुर के साथ देवी का घोर युद्ध हुआ अंत मे दुर्गमासुर मारा गया। इसी स्थल पर मां जगदम्बा ने दुर्गमासुर तथा अन्य दैत्यों का संहार किया व भक्त भूरेदेव(भैरव का एक रूप) को अमरत्व का आशीर्वाद दिया।माँ की असीम अनुकम्पा से वर्तमान में भी सर्वप्रथम उपासक भूरेदेव के दर्शन करते हैं तत्पश्चात पथरीले रास्ते से गुजरते हुये मां शाकम्भरी देवी के दर्शन हेतु जाते हैं। जिस स्थल पर माता ने दुर्गमासुर नामक राक्षस का वध किया था वहाँ अब वीरखेत का मैदान है। जहाँ पर माता सुंदर रूप बनाकर पहाड़ी की शिखा पर बैठ गयी थी वहाँ पर माँ शाकम्भरी देवी का भवन है। जिस स्थान पर माँ ने भूरा देव को अमरत्व का वरदान दिया था वहाँ पर बाबा भुरादेव का मंदिर है। प्राकृतिक सौंदर्य व हरी- भरी घाटी से परिपूर्ण यह क्षेत्र उपासक का मन मोह लेता है। देवीपुराण के अनुसार शताक्षी, शाकम्भरी व दुर्गा एक ही देवी के नाम हैं। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - जनवरी २०२६ 3 शनिवार @िनमामीशमीशान माता शाकम्भरी देची ज्यती हार्दिक शुभ कामनाएँ Motivational Videos App Want जनवरी २०२६ 3 शनिवार @िनमामीशमीशान माता शाकम्भरी देची ज्यती हार्दिक शुभ कामनाएँ Motivational Videos App Want - ShareChat
हिंदू धर्म में पौष माह की पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है. इसे पौष पूर्णिमा भी कहा जाता है. पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा की प्रिय होती है. इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है. पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है. पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है. इस दिन प्रातःकाल स्नान से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए. पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. इसके बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए. किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराएं और तिल,गुड़ और कंबल का दान कर उन्हें विदा करें.ज्योतिष शास्त्र में पौष माह को सूर्य देव का माह कहा लाता है. इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है. पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है. पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संगम होता है. इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती हैं और जीवन में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं. #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - जनवरी २०२६ 3 शनिवार _ पौष पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं )tivatonaleos App Want जनवरी २०२६ 3 शनिवार _ पौष पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं )tivatonaleos App Want - ShareChat
कलाम बेदम शाह वारसी #✒ शायरी
✒ शायरी - कलाम" आदमी कुछ और हमारी नज़र में है अब जब से सुना कि यार लिबास ए-बशर में है अपना ही जल्वा है जो हमारी नज़र में है अब ग़ैर कौन चश्म ए ्हक़ीक़त निगर में है वो गंज ए॰्हुस्न है दिल ए॰वीराँ में जल्वा-्गर फ़ज़्ल ए ख़ुदा से दौलत ए॰कौनैन घर में है फ़रोग़ ए ्नक़्श ए॰कफ़ ए॰पा के फ़ैज़ से बस इक हर ज़र्रा आफ़्ताब तेरी रह-गुज़र में है अल्लाह ख़ैर मेरे दिल ए॰बे क़रार की अंदाज़ यास का निगह-ए नामा-बर में है ख़ुद बीबियों की आँख मिली चश्म एनशौक़ को मेरी नज़र भी आज तुम्हारी नज़र में है बनने से पहले साग़र ए॰्मय टूट जाते हैं क्या मोहतसिब की ख़ाक कफ़ ए॰्कूज़ा गर में है ग़ुर्बत में भी ख़याल एन्वतन साथ साथ है ये भी न हो तो किस का सहारा सफ़र में है 87 ' अपनी कश्ती ए॰ आलम से होशियार तूफ़ान ए-गिर्या आज मिरी चश्म ए॰्तर में है हूँ कि सज्दा करूँ तो किधर करूँ हैरान का'बा में भी वही बुत ए॰्काफ़िर नज़र में है हँसते हैं मेरे गिर्या-ए॰बे इख़्तियार पर ये आप की अदा लब ए ज़ख़्म ए जिगर में है ये जुस्तुजू ` बेदम' भी 'अजब है 'अजब तलाश निकले हैं ढूँडने को उसे हम जो घर में है बेदम शाह वारसी) App Want Motivational Videos कलाम" आदमी कुछ और हमारी नज़र में है अब जब से सुना कि यार लिबास ए-बशर में है अपना ही जल्वा है जो हमारी नज़र में है अब ग़ैर कौन चश्म ए ्हक़ीक़त निगर में है वो गंज ए॰्हुस्न है दिल ए॰वीराँ में जल्वा-्गर फ़ज़्ल ए ख़ुदा से दौलत ए॰कौनैन घर में है फ़रोग़ ए ्नक़्श ए॰कफ़ ए॰पा के फ़ैज़ से बस इक हर ज़र्रा आफ़्ताब तेरी रह-गुज़र में है अल्लाह ख़ैर मेरे दिल ए॰बे क़रार की अंदाज़ यास का निगह-ए नामा-बर में है ख़ुद बीबियों की आँख मिली चश्म एनशौक़ को मेरी नज़र भी आज तुम्हारी नज़र में है बनने से पहले साग़र ए॰्मय टूट जाते हैं क्या मोहतसिब की ख़ाक कफ़ ए॰्कूज़ा गर में है ग़ुर्बत में भी ख़याल एन्वतन साथ साथ है ये भी न हो तो किस का सहारा सफ़र में है 87 ' अपनी कश्ती ए॰ आलम से होशियार तूफ़ान ए-गिर्या आज मिरी चश्म ए॰्तर में है हूँ कि सज्दा करूँ तो किधर करूँ हैरान का'बा में भी वही बुत ए॰्काफ़िर नज़र में है हँसते हैं मेरे गिर्या-ए॰बे इख़्तियार पर ये आप की अदा लब ए ज़ख़्म ए जिगर में है ये जुस्तुजू ` बेदम' भी 'अजब है 'अजब तलाश निकले हैं ढूँडने को उसे हम जो घर में है बेदम शाह वारसी) App Want Motivational Videos - ShareChat
ओशो का वचन #संतो के ज्ञान वर्धक वचन
संतो के ज्ञान वर्धक वचन - जब आप हंस रहे होते हैं तो ईश्वर की इबादत कर रहे होते हैं। और जब आप किसी को हंसा रहे होते हैं तो ईश्वर आप की इबादत कर रहा होता है। ओशो Want Motivational Videos App जब आप हंस रहे होते हैं तो ईश्वर की इबादत कर रहे होते हैं। और जब आप किसी को हंसा रहे होते हैं तो ईश्वर आप की इबादत कर रहा होता है। ओशो Want Motivational Videos App - ShareChat