हिंदू धर्म में पौष माह की पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है. इसे पौष पूर्णिमा भी कहा जाता है. पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा की प्रिय होती है. इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है. पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है. पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है. इस दिन प्रातःकाल स्नान से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए. पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. इसके बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए. किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराएं और तिल,गुड़ और कंबल का दान कर उन्हें विदा करें.ज्योतिष शास्त्र में पौष माह को सूर्य देव का माह कहा लाता है. इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है. पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है. पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संगम होता है. इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती हैं और जीवन में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं.
#शुभ कामनाएँ 🙏

