सुशील मेहता
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सुशील मेहता
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मैं अवकाश प्राप्त डाक्टर हूँ
#शुभ रात्रि
शुभ रात्रि - ম তীক ৪ুঁ. यह तो हम किसी को भी कह सकते हैं लेकिन मैं परेशान हूँ यह कहने के लिए कोई बहुत खास चाहिए...! ८ शुभ रात्रि ম তীক ৪ুঁ. यह तो हम किसी को भी कह सकते हैं लेकिन मैं परेशान हूँ यह कहने के लिए कोई बहुत खास चाहिए...! ८ शुभ रात्रि - ShareChat
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़़ल अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं मैं गिरा तो मसअला बॅन कर खड़ा हो जाऊँगा मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा सारी दुनिया की नज़र में है मिरा अहद ए॰वफ़ा इक तिरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊँगा وR9Wane Monat Ap9| tional Vicleos गज़़ल अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं मैं गिरा तो मसअला बॅन कर खड़ा हो जाऊँगा मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा सारी दुनिया की नज़र में है मिरा अहद ए॰वफ़ा इक तिरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊँगा وR9Wane Monat Ap9| tional Vicleos - ShareChat
#आज का मंत्र
आज का मंत्र - "आज का मंत्र" यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते। न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः "fusdgez: | ঋাণাথ: विवेकशील और बुद्धिमान व्यक्ति सदैव ये चेष्ठा करते हैंकी वे यथाशक्ति कार्य करे और वे वैसा करते भी हैं तथा किसी वस्तु को तुच्छ समझकर उसकी उपेक्षा नहीं करते, वे ही सच्चे ज्ञानी हैं | (विदुूर निति) @myquote "आज का मंत्र" यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते। न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः "fusdgez: | ঋাণাথ: विवेकशील और बुद्धिमान व्यक्ति सदैव ये चेष्ठा करते हैंकी वे यथाशक्ति कार्य करे और वे वैसा करते भी हैं तथा किसी वस्तु को तुच्छ समझकर उसकी उपेक्षा नहीं करते, वे ही सच्चे ज्ञानी हैं | (विदुूर निति) @myquote - ShareChat
शेर #✒ शायरी
✒ शायरी - एक मुद्दत से अपने काम पर हूं जैसे जिन्दा ही तेरे नाम परहूं इश्क़ का आखिरी मक़ाम है मौत और मैं आखिरी मक़ाम पर हूँ @myquote एक मुद्दत से अपने काम पर हूं जैसे जिन्दा ही तेरे नाम परहूं इश्क़ का आखिरी मक़ाम है मौत और मैं आखिरी मक़ाम पर हूँ @myquote - ShareChat
रमजान आरंभ रमजान का पाक महीना आज से आरंभ हो चुका है। इस्लाम में रमजान का महीना बेहद पाक होता है। इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा अनिवार्य रूप से रोजा रखा जाता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, नौवां महीना रमजान का होता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस महीने रोजा रखने वाले रोजेदारों को कई गुना सवाब मिलता है और उन्हें जन्नत नसीब होती है। रमजान का इतिहास क्या है? यह कब से शुरु हुआ? हम इन सवालों के जवाब जानेंगे। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, 610 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद साहब पर लेयलत-उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। तब से रमजान माह को इस्लाम में पाक माह के रूप में मनाया जाने लगा। रमजान का जिक्र कुरान में भी मिलता है। कुरान में जिक्र है कि रमजान माह में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब को अपने दूत के रूप में चुना है। इसलिए रमजान का महीना मुसलमानों के लिए पाक है रमजान को लेकर एक और मान्यता है कि इस पाक महीने में जन्नत के दरवाजे रोजेदारों के लिए खुल जाते हैं, जो लोग रोजा रखते हैं। अल्लाह उन्हें जन्नत भेजता है। रमजान का पहला अशरा रहमत का होता है। दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा अशरा दोजख से आजादी दिलाने का होता है।। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - १८ फरवरी २०२६ बुधवार रमजान मुबारक ~ac 0 MotivationalVideos Apo Want INcRajasthan] १८ फरवरी २०२६ बुधवार रमजान मुबारक ~ac 0 MotivationalVideos Apo Want INcRajasthan] - ShareChat
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस में तेरी क्या हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता प्यासे रहे जाते हैं ज़माने के सवालात किसके लिए ज़़िंदा हूँ बता भी नहीं सकता ढूँड रहे हैं मेरा रातों के पुजारी घर मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे लेे जाए ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता वसीम बरेलवी Moiivational Vicleos Appl Want गज़ल क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस में तेरी क्या हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता प्यासे रहे जाते हैं ज़माने के सवालात किसके लिए ज़़िंदा हूँ बता भी नहीं सकता ढूँड रहे हैं मेरा रातों के पुजारी घर मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे लेे जाए ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता वसीम बरेलवी Moiivational Vicleos Appl Want - ShareChat
कलाम हाफिज #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "ChdI" ब॰फ़िगन बर सफ़ ए रिंदाँ नज़रे बेहतर अज़ीं बर दर-एन्मै॰कदा मी॰कुन गुज़रे बेहतर अज़ीं (ऐ महबूब रिंदों की सफ़ पर उस से बेहतर नज़र डाल (याश्नी सफ़ ए उश्श्शाक़ पर मय-कदे में उसे बेहतर अंदाज़ में दाख़िल हो) 3ঁ লু্ कि मी॰फ़र्मायद মংচরূধ--সন লনন गरचे ख़ूबस्त ओ-्लेकिन क़द्रे बेहतर अज़ीं (मेरे हक़ में उस माशशूक़ के लब ने जो मेहरबानी की है वो अगरचे ख़ूब है लेकिन उस से कुछ बेहतर लुत्फ़ कर) आँ कि फ़िक्रश गिरह अज़ कार एनजहाँ ब॰कुशायद गो दरीं नुक्तः बफ़रमा नज़रे बेहतर अज़ीं (वो जिसकी फ़िक्र दुनिया के लिए कार ्कुशा है, उस से कहो कि उस नुक्ता ए इशश्क़ पर ज़रा उस से बेहतर तरीक़े पर ग़ौर ओ॰फ़िक्र करे दिल बदाँ रूद ए॰गिरामी चे कुनम गर ननदेहम मादर एन्दहर ननदारद पिसरे बेहतर अज़ीं (मैं उस फ़र्ज़ंद ए-गिरामी (मराद रसूलुल्लाह की ज़ात ए॰गिरामी है क्यूँ कि यही मफ़हूम हक़ीक़त से क़रीब है) को दिल न दूँ तो क्या करूँ, मादर ए॰्दहर (ज़माने की माँ याश्नी किसी ज़माने ने) उस से बेहतर बेटा पैदा नहीं किया (याश्नी रसूलुल्लाह से बेहतर कोई किसी ज़माने में नहीं हुआ,  इसलिए आपसे बढ़कर महबूब कौन होगा ঐনা जिसको दिल नज्र किया जाए) (हाफ़िज़) Motivational Videos App Want "ChdI" ब॰फ़िगन बर सफ़ ए रिंदाँ नज़रे बेहतर अज़ीं बर दर-एन्मै॰कदा मी॰कुन गुज़रे बेहतर अज़ीं (ऐ महबूब रिंदों की सफ़ पर उस से बेहतर नज़र डाल (याश्नी सफ़ ए उश्श्शाक़ पर मय-कदे में उसे बेहतर अंदाज़ में दाख़िल हो) 3ঁ লু্ कि मी॰फ़र्मायद মংচরূধ--সন লনন गरचे ख़ूबस्त ओ-्लेकिन क़द्रे बेहतर अज़ीं (मेरे हक़ में उस माशशूक़ के लब ने जो मेहरबानी की है वो अगरचे ख़ूब है लेकिन उस से कुछ बेहतर लुत्फ़ कर) आँ कि फ़िक्रश गिरह अज़ कार एनजहाँ ब॰कुशायद गो दरीं नुक्तः बफ़रमा नज़रे बेहतर अज़ीं (वो जिसकी फ़िक्र दुनिया के लिए कार ्कुशा है, उस से कहो कि उस नुक्ता ए इशश्क़ पर ज़रा उस से बेहतर तरीक़े पर ग़ौर ओ॰फ़िक्र करे दिल बदाँ रूद ए॰गिरामी चे कुनम गर ननदेहम मादर एन्दहर ननदारद पिसरे बेहतर अज़ीं (मैं उस फ़र्ज़ंद ए-गिरामी (मराद रसूलुल्लाह की ज़ात ए॰गिरामी है क्यूँ कि यही मफ़हूम हक़ीक़त से क़रीब है) को दिल न दूँ तो क्या करूँ, मादर ए॰्दहर (ज़माने की माँ याश्नी किसी ज़माने ने) उस से बेहतर बेटा पैदा नहीं किया (याश्नी रसूलुल्लाह से बेहतर कोई किसी ज़माने में नहीं हुआ,  इसलिए आपसे बढ़कर महबूब कौन होगा ঐনা जिसको दिल नज्र किया जाए) (हाफ़िज़) Motivational Videos App Want - ShareChat
दयानन्द सरस्वती का वचन #संतो के ज्ञान वर्धक वचन
संतो के ज्ञान वर्धक वचन - गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करता है और बिना गीत के मर्म को meep छूना मुश्किल है। दयानंद सरस्व्त meepikk Motivatonat Videos App Want' गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करता है और बिना गीत के मर्म को meep छूना मुश्किल है। दयानंद सरस्व्त meepikk Motivatonat Videos App Want' - ShareChat
शुभ बुधवार #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - I ऊंगं गणपतये नमः !! गुणवान मनुष्य के संपर्क में रहकर सामान्य मनुष्य भी गौरव प्राप्त करता है, जैसे के हार में रहकर धागाःभी फूलों ' मस्तक के ऊपर स्थान प्राप्त करता है ।। 18/02/2026 शुभ बुधवार शुभ लाभ श्री गणेशाय नमः शुभ प्रभात वंदनम् श्री गणेश जी की कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदा बनी रहे App Motivational Videos Want I ऊंगं गणपतये नमः !! गुणवान मनुष्य के संपर्क में रहकर सामान्य मनुष्य भी गौरव प्राप्त करता है, जैसे के हार में रहकर धागाःभी फूलों ' मस्तक के ऊपर स्थान प्राप्त करता है ।। 18/02/2026 शुभ बुधवार शुभ लाभ श्री गणेशाय नमः शुभ प्रभात वंदनम् श्री गणेश जी की कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदा बनी रहे App Motivational Videos Want - ShareChat
#प्रातः विचार
प्रातः विचार - शुभ प्रभात जिसने जन्म देने वालों की नहीं कि वह में दुनिया कदर किसी रिश्ते की अहमियत नहीं समझ सकता. Motivational VideosApp Want शुभ प्रभात जिसने जन्म देने वालों की नहीं कि वह में दुनिया कदर किसी रिश्ते की अहमियत नहीं समझ सकता. Motivational VideosApp Want - ShareChat