हर साल 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस मनाया जाता है. इस दिवस का खास मकसद उस जीवन शैली को प्रोत्साहित करना है, जिससे वजन बढ़ने की समस्या को कम कर बीमारियों से बचा जा सके. लोगों को अपना वजन (Weight) संतुलित रखने और मोटापे (Obesity) से होने वाले खतरों के प्रति आगाह किया जाता रहा है. हाल के दशकों में लोगों के खान-पान में काफी बदलाव आया है, जिसकी वजह से लोगों का शारीरिक संतुलन बिगड़ा है. वजन बढ़ने से कई समस्याएं शरीर के अंगों को प्रभावित करती है.
वर्ल्ड ओबेसिटी डे लोगों को सही वजन हासिल करने और उसे मेंटेन रखने को लेकर जागरूक बनाता है. यह दिन पहली बार 2015 में एक वार्षिक अभियान के रूप में व्यावहारिक कार्यों को प्रोत्साहित करने के लक्ष्य के साथ मनाया गया था. 2015 में वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की पहल पर इस दिवस की शुरुआत हुई थी ताकि वैश्विक मोटापे के संकट से लोगों को बचाया जा सके. इंसान के शरीर में जब फैट की मात्रा बढ़ती है तो अतिरिक्त वजन गेन होता है. इसे ही मोटापे के रूप में वर्णित किया जाता है. वसा बढ़ने की वजह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 25 या उससे ज्यादा का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वजन बढ़ने का संकेत करती है. 30 या उससे अधिक BMI वाले लोग मोटापे का शिकार माने जाते हैं.
इंसान मोटापे का शिकार तब होता है, जब कैलोरी लेने और उसके खर्च में असंतुलन होता है. हाल के दशकों में वैश्विक आहार में काफी बदलाव आया है. खान-पान का तरीका बदला है. अधिक फैट वाले खाद्य पदार्थों की खपत में इजाफा हुआ है. काम करने के तरीके में बदलाव आया है. ट्रांसपोर्ट की पहुंच काफी बढ़ी है. इससे लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम हुई हैं. मोटापे की वजह से हर साल लाखों लोग मर रहे हैं. ये अक्सर देखा गया है कि अधिकांश अधिक वजन वाले या मोटे बच्चे विकासशील देशों में हैं.इंसान जब मोटापे का शिकार हो जाता है तो वो कई बीमारियों से घिर जाता है. इससे हार्ट अटैक का खतरा और डायबिटीज की समस्या बढ़ जाती है. डायबिटीज से अंधापन होने का भी खतरा है, साथ ही किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है. मोटापे को लिवर, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, ओवेरियन, गॉल ब्लैडर, किडनी और कोलन जैसे कैंसर से भी जोड़कर देखा जाता है.खान पान में संतुलन जरूरी है. अधिक फैटी भोजन से बचना चाहिए. डॉक्टर और एक्सपर्ट यह दावा करते रहे हैं कि संतुलित आहार लेने, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने, नियमित व्यायाम करने से मोटापे के जोखिम को कम किया जा सकता है. #जागरूकता दिवस
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (नेशनल सेफ्टी डे) भारत में हर साल 4 मार्च के दिन मनाया जाता है. इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य हमारे जीवन के विभिन्न समयों में जागरूकता न होने या ध्यान न देने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है. पहले से मनाए जाने वाले नेशनल सेफ्टी डे को अब नेशनल सेफ्टी सप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा है. इस सप्ताह के दौरान विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से औद्योगिक दुर्घटनाओं से बचाव के तरीको से लोगों को अवगत कराया जाता है. इस पूरे सप्ताह में की जाने वाली प्रत्येक गतिविधी का एक मात्र उद्देश्य लोगों को उनकी सुरक्षा के लिए जागरूक कर उन्हे सुरक्षा के विभिन्न तरीको से अवगत करना होता है।
इस दिन को अस्तित्व में लाने की पहल नेशनल सेफ्टी काउंसिल द्वारा ही की गई थी. 4 मार्च के ही दिन भारत में नेशनल सेफ्टी काउंसिल की स्थापना हुई थी, इसलिए इस दिन को ही नेशनल सेफ्टी डे के रूप में मनाया जाता है. नेशनल सेफ्टी काउंसिल एक स्वशासी निकाय है, जो कि सार्वजनिक सेवा के लिए गैर सरकारी और गैर लाभकारी संगठन के रूप में कार्य करता है. इस संगठन की स्थापना साल 1966 में मुंबई सोसायटी अधिनियम के तहत हुई थी, जिसमें आठ हजार सदस्य शामिल थे. इसके बाद साल 1972 में इस संगठन द्वारा नेशनल सेफ्टी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया. और इसके बाद बहुत ही जल्द इसे नेशनल सेफ्टी डे की जगह नेशनल सेफ्टी सप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा। #शुभ कामनाएँ 🙏
रंगवाली होली
हिन्दू पंचांग के अनुसार होली का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। यदि प्रतिपदा दो दिन पड़ रही हो तो पहले दिन को ही धुलण्डी (वसन्तोत्सव या होली) के तौर पर मनाया जाता है। इस त्योहार को बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए मनाते हैं। बसंत ऋतु में प्रकृति में फैली रंगों की छटा को ही रंगों से खेलकर वसंत उत्सव होली के रूप में दर्शाया जाता है। विशेषतः हरियाणा में इस पर्व को धुलंडी भी कहा जाता है।रंगवाली होली को राधा-कृष्ण के पावन प्रेम की याद में भी मनाया जाता है। कथानक के अनुसार एक बार बाल-गोपाल ने माता यशोदा से पूछा कि वे स्वयं राधा की तरह गोरे क्यों नहीं हैं। यशोदा ने मज़ाक़ में उनसे कहा कि राधा के चेहरे पर रंग मलने से राधाजी का रंग भी कन्हैया की ही तरह हो जाएगा। इसके बाद कान्हा ने राधा और गोपियों के साथ रंगों से होली खेली और तब से यह पर्व रंगों के त्योहार के रूप में मनाया जा रहा है।
यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव के श्राप के कारण धुण्डी नामक राक्षसी को पृथु के लोगों ने इस दिन भगा दिया था, जिसकी याद में होली मनाते हैं।
होली से सम्बन्धित मुख्य कथा के अनुसार एक नगर में हिरण्यकश्यप नाम का दानव राजा रहता था। वह सभी को अपनी पूजा करने को कहता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का उपासक भक्त था। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट रूप से कहा, पिताजी! परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु परमात्मा से उत्तम नहीं हो सकता।
होली से सम्बन्धित मुख्य कथा के अनुसार एक नगर में हिरण्यकश्यप नाम का दानव राजा रहता था। वह सभी को अपनी पूजा करने को कहता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का उपासक भक्त था। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट रूप से कहा, पिताजी! परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु परमात्मा से उत्तम नहीं हो सकता।<
यह बात सुनकर अहंकारी हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल पीला हो गया और नौकरों सिपाहियों से बोला कि इसको ले जाओ मेरी आँखों के सामने से और जंगल में सर्पों में डाल आओ। सर्प के डसने से यह मर जाएगा। ऐसा ही किया गया। परंतु प्रहलाद मरा नहीं, क्योंकि सर्पों ने डसा नहीं।
प्रह्लाद की कथा के अतिरिक्त यह पर्व राक्षसी ढुंढी, राधा कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से भी जुड़ा हुआ है।[13] कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।
#शुभ कामनाएँ 🙏













