सुशील मेहता
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सुशील मेहता
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मैं अवकाश प्राप्त डाक्टर हूँ
#शुभ रात्रि
शुभ रात्रि - आजा कै ल्िष्ट Prajapai Mikas | eNignt Good Prajapat Vikas / Vikas और Prajapat Vikas | कुला कै त्िए Tojapat japat 010 dlappy Mikas | Prajapat Ids ని Prajapat Mikas | आजा कै ल्िष्ट Prajapai Mikas | eNignt Good Prajapat Vikas / Vikas और Prajapat Vikas | कुला कै त्िए Tojapat japat 010 dlappy Mikas | Prajapat Ids ని Prajapat Mikas | - ShareChat
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल दिल की गली में कौन था, आकर ठहर गया, बे-सौत दस्तकें थी, असर छोड़ कर गया।। कुछ अजनबी से लोगों की, किस्मत बदल गयी, लम्हों का सिलसिला था, मोड़ कर चला गया।। वो नक़्श - ए॰पा था या कोई ख़्वाब एनशाम था, ख़ामुशी से, सहर छोड़ कर गया।। 3Iளி राह-ए - वफ़ा में कितने ही मंजर बिखर गये, एक शख़्स था कि दिल में उतर गया। | माजिद " ये इश्क़ क्या हैं, अजब इम्तिहान हैं, जिस पर भरोसा था, वही दिल तोड़ कर गया।| माजिद की ग़ज़ल App Motivational Videos Want गज़ल दिल की गली में कौन था, आकर ठहर गया, बे-सौत दस्तकें थी, असर छोड़ कर गया।। कुछ अजनबी से लोगों की, किस्मत बदल गयी, लम्हों का सिलसिला था, मोड़ कर चला गया।। वो नक़्श - ए॰पा था या कोई ख़्वाब एनशाम था, ख़ामुशी से, सहर छोड़ कर गया।। 3Iளி राह-ए - वफ़ा में कितने ही मंजर बिखर गये, एक शख़्स था कि दिल में उतर गया। | माजिद " ये इश्क़ क्या हैं, अजब इम्तिहान हैं, जिस पर भरोसा था, वही दिल तोड़ कर गया।| माजिद की ग़ज़ल App Motivational Videos Want - ShareChat
#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र शुभ्रयशोवितानं निरामयं आयुर्धनं. जीवनसंविधानम्। समागतो होलिकोत्सवोड्यं ददातु ते मांगलिकं fae1-4II भावार्थः यह होली का त्यौहार आपको लंबी आयु, धन वैभव , निर्मल यश , निरोगी जीवन और मंगलमय विधान प्रदान करे। @myquote आज का मंत्र शुभ्रयशोवितानं निरामयं आयुर्धनं. जीवनसंविधानम्। समागतो होलिकोत्सवोड्यं ददातु ते मांगलिकं fae1-4II भावार्थः यह होली का त्यौहार आपको लंबी आयु, धन वैभव , निर्मल यश , निरोगी जीवन और मंगलमय विधान प्रदान करे। @myquote - ShareChat
#सुविचार##
सुविचार## - Beat जरुरी नहीं ` की kl जिनमे साँसे नहीं B वो ही मुर्दा हैं skli निहीमेवो कौनिसेत k जिनमे Be  ٤ ?esk. @> @ Motivational Videos App Want Beat जरुरी नहीं ` की kl जिनमे साँसे नहीं B वो ही मुर्दा हैं skli निहीमेवो कौनिसेत k जिनमे Be  ٤ ?esk. @> @ Motivational Videos App Want - ShareChat
विश्व श्रवण दिवस दुनिया भर में लोगों की सुनने की क्षमता और बहरेपन की समस्या से बचाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने नया मानक जारी किया है। डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी यह नया मानक उन स्थानों और गतिविधियों पर लागू होता है, जहां तेज आवाज में संगीत बजाया जाता है। डब्ल्यूएचओ ने यह नया मानक विश्व श्रवण दिवस 2022 से ठीक पहले जारी किया है जो हर साल 03 मार्च को मनाया जाता है। इस बार विश्व श्रवण दिवस की थीम "जीवन भर सुनें, ध्यान से सुनें" है। लम्बे समय तक तेज संगीत और अन्य तरह के शोर के संपर्क में आने का खतरा कितना गंभीर है उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इस शोर की वजह से दुनिया में करीब 12 से 35 वर्ष के 100 करोड़ लोगों पर स्थाई तौर पर बहरा होने का खतरा मंडरा रहा है। इससे न केवल उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही शिक्षा और रोजगार की संभावनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2050 तक करीब 250 करोड़ लोगों की कुछ हद तक सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं इनमें से करीब 70 करोड़ लोगों को श्रवण क्षमता में सुधार के लिए इलाज की जरुरत होगी। गौरतलब है कि सुनने की क्षमता में कमी का आना अथवा बहरापन ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी सुनने की क्षमता खो देता है। इस बारे में डब्ल्यूएचओ के नॉन कम्युनिकेबल डिजीज डिपार्टमेंट की निदेशक बेंट मिकेलसन का कहना है कि निजी ऑडियो उपकरणों के असुरक्षित उपयोग और नाइटक्लब, बार, संगीत कार्यक्रम और खेल आयोजनों जैसे स्थलों पर तेज शोर के संपर्क में आने के कारण लाखों किशोरों और युवाओं की श्रवण क्षमता को नुकसान होने का खतरा है। उनके अनुसार यह जोखिम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि अधिकांश ऑडियो डिवाइस, वेन्यू और इवेंट में ध्वनि का सुरक्षित स्तर क्या होना चाहिए इसका विकल्प नहीं प्रदान करते। उनके अनुसार इस नए मानक का उद्देश्य युवाओं को भीतर सुरक्षा प्रदान करना है। #जागरूकता दिवस
जागरूकता दिवस - ३ मार्च विश्व श्रवण दिवस जीवन के लिए چ66,_ ধস্রান মী মুননা (To heor for life, listen with care) ideosAAporov Motivational MWant mpmugov in TIUIUSTI ३ मार्च विश्व श्रवण दिवस जीवन के लिए چ66,_ ধস্রান মী মুননা (To heor for life, listen with care) ideosAAporov Motivational MWant mpmugov in TIUIUSTI - ShareChat
विश्व वन्यजीव दिवस प्रतिवर्ष 03 मार्च को सम्पूर्ण देश में विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) मनाया जाता है. विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में नामित करने का मुख्य उद्देश्य दुनिया के वन्य जीवों एवं वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस खास दिवस पर विश्वभर की सरकारें वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई तरह के जागरूकता अभियान आोजित करती हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल अलग-अलग थीम से इस खास दिवस को मनाता है. विश्व वन्यजीव दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्वभर में वन्यजीवों की सुरक्षा तथा वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है. पूरे विश्व के सभी देशों के साथ इस दिन भारत में भी वन्य जीवों हेतु जागरूकता फैलाई जाती है और प्रकृति और मानव के संबंधों को दर्शाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत थाईलैंड द्वारा दुनिया के जंगली जीवों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था।। महासभा ने वन्यजीवों के पारिस्थितिक, आनुवांशिक,वैज्ञानिक, सौंदर्य सहित विभिन्न प्रकार से अध्ययन अध्यापन को बढ़ावा देने को प्रेरित किया । विभिन्न जीवों और वनस्पतियों की प्रजातियों के अस्तित्व की रक्षा भी इसका उद्देश्य कहा जा सकता है। अपने प्रस्ताव में, महासभा ने वन्यजीवों के आंतरिक मूल्य और पारिस्थितिक, आनुवांशिक, सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन और सौंदर्य सहित विभिन्न योगदानों की पुष्टि की, ताकि सतत विकास और मानव कल्याण हो । #जागरूकता दिवस
जागरूकता दिवस - विश्न्यजीव दिवस 03 March वन्य जीव हमारे पर्यावरण की शोभा हैं। आइये, इस दिवस पर हम सभी मिलकर संकल्प कि मानव और प्रकृति के कल्याण हेतु वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के सरक्षण की दिशा में जागरूकता को बढ़ावा देंगे। विश्न्यजीव दिवस 03 March वन्य जीव हमारे पर्यावरण की शोभा हैं। आइये, इस दिवस पर हम सभी मिलकर संकल्प कि मानव और प्रकृति के कल्याण हेतु वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के सरक्षण की दिशा में जागरूकता को बढ़ावा देंगे। - ShareChat
चैतन्य महाप्रभु जन्म दिन चैतन्य महाप्रभु का जन्म संवत् १५४२ विक्रमी की फाल्गुनी पूर्णिमा, होली के दिन बंगाल के नवद्वीप नगर में हुआ था । उनके पिता का नाम पंडित जगन्नाथ मिश्र और माता का नाम शचीदेवी था। पिता सिलहट के रहनेवाले थे। नवद्वीप में पढ़ने के लिए आये थे। बाद में वहीं बस गये। वहीं पर शचीदेवी से विवाह हुआ। एक के बाद एक करके उनके आठ कन्याएं पैदा हुईं और मरती गईं। फिर एक लड़का पैदा हुआ। भगवान की दया से वह बड़ा होने लगा। उसका नाम उन्होंने विश्वरूप रखा। विश्व रूप जब दस बरस का हुआ तब उसके एक भाई और हुआ। माता-पिता की खुशी का ठिकाना न रहा। बुढ़ापे में एक और बालक को पाकर वे फूले नहीं समाये। कहते हैं, यह बालक तेरह महीने माता के पेट में रहा। उसकी कुंडली बनाते ही ज्योतिषी ने कह दिया था कि वह महापुरूष होगा। यही बालक आगे चलकर चैतन्य महाप्रभु हुआ। चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी, भजन गायकी की एक नयी शैली को जन्म दिया तथा राजनैतिक अस्थिरता के दिनों में हिंदू-मुस्लिम एकता की सद्भावना को बल दिया, जाति-पांत, ऊंच-नीच की भावना को दूर करने की शिक्षा दी तथा विलुप्त वृंदावन को फिर से बसाया और अपने जीवन का अंतिम भाग वहीं व्यतीत किया। चैतन्य के अनुसार भक्ति ही मुक्ति का साधन है। उनके अनुसार जीवो के दो प्रकार होते है, नित्य मुक्त और नित्य संसारी। नित्य मुक्त जीवो पर माया का प्रभाव नही पड़ता जबकि नित्य संसारी जीव मोह-माया से भरे होते है। चैतन्य महाप्रभु कृष्णा भक्ति के धनि थे। न्यायशास्त्र में उन्हें प्रसिद्ध पंडित भी कहा जाता था। युवावस्था में ही चैतन्य महाप्रभु ने घर को छोड़कर सन्यास ले लिया था। #शत शत नमन
शत शत नमन - भक्ति काल के प्रमुख संत चैतन्य महयप्रभु की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन 3 মানঘ 2026 मंगलवार BhajanWante  MotivationalVideosIAppobhajanlal  भक्ति काल के प्रमुख संत चैतन्य महयप्रभु की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन 3 মানঘ 2026 मंगलवार BhajanWante  MotivationalVideosIAppobhajanlal - ShareChat
हिंदू धर्म में लक्ष्मी जयंती का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. लक्ष्मी जयंती का व्रत फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन किया जाता है. लक्ष्मी जयंती के दिन माता लक्ष्मी की खास पूजा की जाती है. भविष्य पुराण में बताया गया है कि लक्ष्मी जयंती के दिन विधि विधान के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है. माँ लक्ष्मी बहुत ही दयालु हैं इसलिए जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ लक्ष्मी जयंती के दिन इनकी पूजा अर्चना करता है उसके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है और उसके परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भविष्य पुराण के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी देवताओं से नाराज होकर क्षीरसागर के अंदर प्रवेश कर गयी थी. इसके बाद सभी देवता लक्ष्मी विहीन हो गए. माँ लक्ष्मी के जाने से पूरे संसार में हाहाकार मच गया. इसके पश्चात स्वर्ग के स्वामी इंद्र ने कठोर तपस्या की और विशेष विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजा अर्चना की. इंद्रदेव को देखकर बाकी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भी माता लक्ष्मी का विधि विधान के साथ पूजन की.अपने भक्तों की भक्ति को देखकर मां लक्ष्मी प्रसन्न हुई और फिर से उनके सामने प्रकट हुई. तभी से इस दिन को लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है.स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत ही सौभाग्यशाली माना जाता है. अगर कोई स्त्री लक्ष्मी जयंती का व्रत करती है तो उसे संतान धन वैभव और शांति की प्राप्ति होती है. • बहुत से लोग पंचमी तिथि के दिन हर महीने मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. • लक्ष्मी जयंती का व्रत करने से सभी प्रकार के रोग और कष्ट से मुक्ति मिलती है और घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती हैं. • लक्ष्मी जयंती के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करने से घर के सभी संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं. • इस व्रत को करने से मनुष्य को न सिर्फ भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है बल्कि मानसिक शातिं की भी प्राप्ति होती है. • यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा की आपके घर में लक्ष्मी नहीं आ रही हैं, या धन के आने के बाद धन टिकता नहीं है तो लक्ष्मी जयंती का व्रत जरूर करें. • इस व्रत को करने और श्रद्धा पूर्वक माँ लक्ष्मी का ध्यान कर पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन से जुडी समस्याएं दूर हो जाती हैं. हिंदू धर्म में लक्ष्मी जयंती का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. लक्ष्मी जयंती का व्रत फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन किया जाता है. लक्ष्मी जयंती के दिन माता लक्ष्मी की खास पूजा की जाती है. भविष्य पुराण में बताया गया है कि लक्ष्मी जयंती के दिन विधि विधान के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है. माँ लक्ष्मी बहुत ही दयालु हैं इसलिए जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ लक्ष्मी जयंती के दिन इनकी पूजा अर्चना करता है उसके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है और उसके परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भविष्य पुराण के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी देवताओं से नाराज होकर क्षीरसागर के अंदर प्रवेश कर गयी थी. इसके बाद सभी देवता लक्ष्मी विहीन हो गए. माँ लक्ष्मी के जाने से पूरे संसार में हाहाकार मच गया. इसके पश्चात स्वर्ग के स्वामी इंद्र ने कठोर तपस्या की और विशेष विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजा अर्चना की. इंद्रदेव को देखकर बाकी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भी माता लक्ष्मी का विधि विधान के साथ पूजन की.अपने भक्तों की भक्ति को देखकर मां लक्ष्मी प्रसन्न हुई और फिर से उनके सामने प्रकट हुई. तभी से इस दिन को लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है.स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत ही सौभाग्यशाली माना जाता है. अगर कोई स्त्री लक्ष्मी जयंती का व्रत करती है तो उसे संतान धन वैभव और शांति की प्राप्ति होती है. • बहुत से लोग पंचमी तिथि के दिन हर महीने मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. • लक्ष्मी जयंती का व्रत करने से सभी प्रकार के रोग और कष्ट से मुक्ति मिलती है और घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती हैं. • लक्ष्मी जयंती के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करने से घर के सभी संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं. • इस व्रत को करने से मनुष्य को न सिर्फ भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है बल्कि मानसिक शातिं की भी प्राप्ति होती है. • यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा की आपके घर में लक्ष्मी नहीं आ रही हैं, या धन के आने के बाद धन टिकता नहीं है तो लक्ष्मी जयंती का व्रत जरूर करें. • इस व्रत को करने और श्रद्धा पूर्वक माँ लक्ष्मी का ध्यान कर पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन से जुडी समस्याएं दूर हो जाती हैं. #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - माता लक्ष्मी जयंती हार्दिक शुभ कामनाएँ ३ मार्च २०२६ मंगलवार App Motivational Videos Want माता लक्ष्मी जयंती हार्दिक शुभ कामनाएँ ३ मार्च २०२६ मंगलवार App Motivational Videos Want - ShareChat
होलिका दहन होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। होलिका दहन होलिका दहन, होली त्योहार का पहला दिन, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि नामों से भी जाना जाता है। होली बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। होलिका दहन (जिसे छोटी होली भी कहते हैं) के अगले दिन पूर्ण हर्षोल्लास के साथ रंग खेलने का विधान है और अबीर-गुलाल आदि एक-दूसरे को लगाकर व गले मिलकर इस पर्व को मनाया जाता है। होली का त्योहार भारतवर्ष में अतिप्राचीन काल से मनाया जाता आ रहा है। इतिहास की दृष्टि से देखें तो यह वैदिक काल से मनाया जाता आ रहा है। हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है। चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था। इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था। इन सभी खुशियों को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा हुडदंग और रंगोत्सव का यह भी कारण बताया जाता है कि नृसिंह रूप में भगवान इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्य नामक महाअसुर का वध कर भक्त प्रह्लाद को दर्शन दिए थे। दोल जात्रा या दोल उत्सव बंगाल में होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। डोलजात्रा बांग्ला मास के पन्द्रहवें दिन - फाल्गुन को मनाया जाता है। डोलजात्रा पूर्णिमा का त्योहार है। इस दिन महिलाएँ लाल किनारी वाली पारंपरिक सफ़ेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं और प्रभात-फेरी (सुबह निकलने वाला जुलूस) का आयोजन करती हैं। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं। दोल शब्द का मतलब झूला होता है। झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्ति रख कर महिलाएँ भक्ति गीत गाती हैं और उनकी पूजा करती है। इस दिन अबीर और रंगों से होली खेली जाती है। इस दोल यात्रा में चैतन्य महाप्रभु द्वारा रचित कृष्ण-भक्ति संगीत की प्रचुरता रहती है। प्राचीन काल में इस अवसर पर ज़मीदारों की हवेलियों के सिंहद्वार आम लोगों के लिए खोल दिये जाते थे। उन हवेलियों में राधा-कृष्ण के मंदिर में पूजा-अर्चना और भोज चलता रहता था। किंतु समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आया है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - ३ मार्च २०२६ ENA ೦ IclqR HOLI LARNMORE` जिस तरह होलिका जलकर हो गई थी राख उसी तरह आपके जीवन के मिट जाए सारे कष्ट और पाप. B೪೯ಖಣಞಣದ u ತರವೆ अन्याय व अधर्म पर भक्ति व सत्य की जीत का संदेश देने वाले पावन त्यौहार ಕಣಾ 557 ಹudust शमकामनाएं App rideos Want Motivationat ३ मार्च २०२६ ENA ೦ IclqR HOLI LARNMORE` जिस तरह होलिका जलकर हो गई थी राख उसी तरह आपके जीवन के मिट जाए सारे कष्ट और पाप. B೪೯ಖಣಞಣದ u ತರವೆ अन्याय व अधर्म पर भक्ति व सत्य की जीत का संदेश देने वाले पावन त्यौहार ಕಣಾ 557 ಹudust शमकामनाएं App rideos Want Motivationat - ShareChat
फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर में पूर्णिमा के दिन को उत्तर भारतीय राज्यों में पूर्णिमा, दक्षिण भारतीय राज्यों में पूर्णमनी और गुजरात में पूनम के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यह पूर्णिमा फागुन में पडती है लेकिन बसंत ऋतु होने के कारण बसंत पूर्णिमा भी कहलाती है। वसंत पूर्णिमा के व्रत का पालन करते हुए, वसंत पूर्णिमा कथा को पढ़ना या सुनना अति आवश्यक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, वसंत पूर्णिमा एक शुभ समय है जब देवी लक्ष्मी अवतरित हुई थीं। समुद्र मंथन के दौरान, समुद्र मंथन की प्रक्रिया में कई चीजें सामने आईं जो राक्षसों और देवताओं के बीच समान रूप से वितरित की गईं। वसंत पूर्णिमा के दिन, देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर आईं और भगवान विष्णु को अपना गुरु चुना। इस प्रकार, सत्यनारायण कथा के साथ, लक्ष्मी पूजा कथा (वसंत पूर्णिमा कथा) भी देवताओं के दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस शुभ दिन की पूर्व संध्या पर की जाती है। त्योहारों और जयंती दिनों के अलावा, कई परिवार पारंपरिक रूप से वर्ष में पूर्णिमासी के दिन एक दिन का उपवास रखते हैं। सत्य नारायण जी की पूजा भी करते हैं। पूर्णिमा दिवस या पूर्णिमा को बहुत पवित्र और लाभदायक दिन माना जाता है। यह दिवस और दिन पूनम, पूर्णिमा और पूर्णिमा जैसे अनेक नामों से जाना और मनाया जाता है। भक्तजन इस विशेष दिन पर व्रत रखते हैं और चंद्रदेव और भगवान विष्णु जी की आराधना करते हैं। अंतिम पूर्णिमा, फाल्गुन पूर्णिमा को माना जाता है, जिस दिन होलिका दहन और होली का त्योहार मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर, अलग-अलग स्थानों पर, लोग लक्ष्मी की पूजा कर लक्ष्मी जयंती भी मनाते हैं, जो देवी लक्ष्मी की जयंती है, जो बहुतायत और धन की देवी है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जो लोग फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत रखते हैं और इस दिन भगवान विष्णु और भगवान चंद्रमा की पूजा करते हैं, उन्हें देवता के दिव्य आशीर्वाद से सम्मानित किया जाता है और उनके वर्तमान और पिछले पापों से भी छुटकारा मिलता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - 3 মার্ন 2026 आप सभी को फाल्गून मंगलवार पुर्णिमा 6 हार्दिक शुभकामनाएं bogeshwardhamsaNWat@MotivatiohalVijdedsAPjonbageshwardhamsarkar 3 মার্ন 2026 आप सभी को फाल्गून मंगलवार पुर्णिमा 6 हार्दिक शुभकामनाएं bogeshwardhamsaNWat@MotivatiohalVijdedsAPjonbageshwardhamsarkar - ShareChat