#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️
#वो_ईश्वरीय_संविधान...
जिनका ये दुनियां वाले पालन ही नहीं कर रहे हैं और अपने मंगल की कामना करते हैं तो फिर यह कैसे संभव हैं ?
पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में बताया गया हैं कि
गुरू को तजै भजै जो आना। ता पशुवा को फोकट ज्ञाना।।
जो गुरूमुखी नहीं हैं उनकी तो बात ही छोड़ दीजिए कि उनके सांथ क्या बनेगी, लेकिन
जो ब्यक्ति किसी सन्त को गुरू बना लिया हैं और वह अपने गुरू को छोड़कर अन्य (देवी देवताओं की,माई मशानी सेढ़ शीतला भैरो भूत हनुमंत आदि की,पत्थर पानी की) पूजा करता हैं वह ब्यक्ति पशु समान हैं और उसे फोकट ज्ञान हैं अर्थात् कहने सुनने के लिए तो वह ज्ञानी हैं लेकिन दरअसल वह पशु के समान टोटल अज्ञानी ही हैं,ऐसे मनुष्य को कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल सकता हैं।
क्योंकि वह परमात्मा ने स्पष्ट रूप से यह संकेत किया हैं कि
गुरू के मिले कटे दुःख पापा। जन्म जन्म के मिटें संतापा।।
गुरू के चरण सदा चित्त दीजै। जीवन जन्म सुफल कर लीजै।।
गुरू भगता मम आतम सोई। वाके हृदय रहूँ समोई।।
अड़सठ तीर्थ भ्रम भ्रम आवे। सो फल गुरू के चरनों पावे।।
और अधिक जानकारी हेतु सपरिवार देखिए
साधना टीवी चैनल सायं 07:30 pm.