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जय माता लक्ष्मी का दिलकश हुक: "बूँदें जब कम और विश्वास जब ज़्यादा हों, वही असली धन है" 🙏✨ — जो देवी समुंद्र मंथन से उत्पन्न होकर कमल पर विराजमान हुईं, वह सिर्फ दौलत की देवी नहीं बल्कि चार पुरुषार्थ — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — की प्रतिमूर्ति हैं; उनका कमल का प्रतीक बताता है कि गंदे पानी में भी सम्मान और शुद्धता खिल सकती है (रिवायती रूप और प्रतीकात्मक विश्लेषण)। विज्ञान की नज़र से कहा जाए तो पूजा-अर्चना जैसे सामुदायिक समारोहों से सामाजिक बंधन और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है, जिससे आर्थिक व्यवहारों में संयम और दीर्घकालिक निवेश (savings/investment) का प्रोत्साहन मिलता है — यही आध्यात्मिक अर्थ और व्यवहारिक तर्क का मेल है। एक प्रेरक उद्धरण जो आज के डिजिटल ज़माने में चलेगा: "लक्ष्मी घर नहीं, मन को बसती है — दिल साफ रखो, धन अपने आप आएगा" 💫🏵️। #जयमातालक्ष्मी #Lakshmi #दिवालीPrep #Prosperity #कमलकीमाया 🪔📿. @Jai lakshmi mata 🙏 @Jai Lakshmi mata ji #jai mata lakshmi #जय लक्ष्मी माता #जय माता लक्ष्मी #--- #🙏Jai Mata Rani