इस यंत्र का महत्व
यह यंत्र नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा, नजर दोष और तांत्रिक क्रियाओं से रक्षा करने के लिए बनाया जाता है।
इसमें विशेष बीज मंत्र और रेखांकन (ज्यामितीय आकृतियां) होते हैं, जिनमें देवताओं के आवाहन और बीजाक्षर अंकित होते हैं।
इसको धारण करने से व्यक्ति की आभा (Aura) मजबूत होती है और मनोबल बढ़ता है।
पूजा विधि (Raksha Yantra Puja Vidhi)
स्थान और समय
शुभ मुहूर्त (जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, मंगलवार या शनिवार) पर इसका पूजन करें।
यंत्र को लाल कपड़े या पीले कपड़े पर स्थापित करें।
शुद्धिकरण
पहले यंत्र को गंगाजल या कच्चे दूध से धोकर शुद्ध करें।
उस पर चंदन, हल्दी और कुंकुम का तिलक करें।
आवाहन
दीपक और अगरबत्ती जलाकर यंत्र के सामने रखें।
पुष्प, अक्षत (चावल), दूर्वा, और तुलसी पत्र अर्पित करें।
मंत्र जाप
यदि यह मधु रक्षा यंत्र है तो “ॐ ह्लीं ......
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सामान्य रक्षा यंत्र के लिए “ॐ ह्लीं वज्र कवचाय हुम् फट्” का 108 बार जाप करें।
स्थापना या धारण
पूजन के बाद यंत्र को ताबीज बनवाकर गले, दाहिने हाथ या कमर पर बांधा जा सकता है।
अथवा इसे घर/दुकान के पूजास्थल में रखें।
अन्य उपाय (Yantra के साथ मिलाकर)
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ रोज़ करें।
शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रोज़ सुबह गंगाजल का छिड़काव करें।
घर के मुख्य द्वार पर नींबू-मिर्च का तोरण बांधें – यह नज़र दोष दूर करता है।
अपने पास लाल चंदन की माला रखें और संकट के समय “ॐ हनुमते नमः” का जप करें।