यह चित्र एक अत्यंत पवित्र रक्षा यंत्र-मंत्र है, जिसमें वेद-मंत्रों, विशेष नाम-संरक्षण प्रार्थना और "ॐ" शक्ति का संगम दिखाई देता है।
प्रमुख विशेषताएँ –
1. महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग
यंत्र के चारों ओर लिखा है –
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
यह महामृत्युंजय मंत्र शिवजी का अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है, जो प्राण, आयु, रोग-शांति और रक्षा प्रदान करता है।
इसके प्रयोग से साधक मृत्यु के भय, अकाल संकट और रोग-बाधाओं से सुरक्षित रहता है।
2. मध्य का नाम मंत्र
बीच में लिखा है –
"ॐ मधुकर सिंह पटेल को रक्षय–रक्षय, पालय–पालय"
यह व्यक्तिगत रक्षा प्रार्थना है। जब किसी का नाम लेकर ईश्वर से रक्षा मांगी जाती है, तो वह यंत्र व्यक्तिगत कवच बन जाता है।
3. बीज मंत्रों का सहारा
नीचे लिखा गया है –
ॐ हौं जूं सः ॐ
ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ
ये बीज मंत्र (हौं, जूं, सः) शिव-शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सूक्ष्म रूप हैं।
इनका प्रयोग यंत्र में दिव्य चेतना (प्राण-प्रतिष्ठा) स्थापित करता है।
4. ॐ का आध्यात्मिक महत्व
यंत्र में हर ओर "ॐ" अंकित है।
"ॐ" ध्वनि सम्पूर्ण ब्रह्मांड का मूल स्वर है और यह यंत्र को जीवन्त और ऊर्जावान बनाती है।
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महत्व –
यह रक्षा यंत्र साधक के चारों ओर अदृश्य महामृत्युंजय कवच तैयार करता है।
यह विशेषकर रोग, भय, आकस्मिक दुर्घटना और नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला है।
इसे अपने पास रखने या पूजा स्थल पर स्थापित कर प्रतिदिन धूप-दीप, जल अर्पण और "महामृत्युंजय मंत्र" का जप करने से साधक का जीवन सुरक्षित रहता है।
यह यंत्र व्यक्ति को दीर्घायु, स्वास्थ्य, शांति और दिव्य संरक्षण प्रदान करता है।
👉 संक्षेप में, यह यंत्र महामृत्युंजय मंत्र, बीज मंत्र और व्यक्तिगत नाम-संरक्षण मंत्र का संयुक्त दिव्य कवच है, जो साधक को हर प्रकार के संकट से रक्षा प्रदान करता है और जीवन में स्थिरता, सुरक्षा व शांति लाता है।
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