digital निर्माता
701 views
🔥 सुनते ही रूह तक झंकृत कर देने वाली वो पंक्ति — "चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है" — जिसे नरेंद्र चंचल जैसे गायकों ने अमर कर दिया और भजन-संस्कृति में एक पहचान बना दी है। 1977 की फिल्म भी उसी भाव-रचना से जुड़ी यादों को जिन्दा रखती है, जहां इस विषयवस्तु ने वेदनात्मक भक्तिगीतों को सिनेमा के साथ जोड़ा। बॉलीवुड/आधुनिक रिकॉर्डिंगों में भी यह मंत्र-मेलोडी बार-बार रिमिक्स या अलबम वर्जन में सुनने को मिलता है — जैसे सोनू निगम का ट्रैक — जो पारंपरिक भक्ति को नई पीढ़ी के संगीत स्वाद से जोड़ता है। वैज्ञानिक नजरिये से देखा जाए तो ऐसे मंत्र-आधारित भजन (रिपीट होने वाला रिदम + सामूहिक गायन) दिमाग में एल्पा/थीटा तरंगों को बढ़ाते, तनाव घटाते और समूह बंधन (oxytocin + mood uplift) मजबूत करते हैं — इसलिए भी 'जय माता दी' का असर व्यक्तिगत भावनाओं से आगे जाकर सामाजिक जुड़ाव और मानसिक शांति तक फैलता है। ये जानकर भी दिल बड़ा खुश होता है कि पुरानी धुनें जब वैज्ञानिक रूप से भी लाभदायक सिद्ध हों तो उनकी महिमा और भी गूढ बन जाती है — 🎶🙏✨ #जयमातादी #माँकीभक्ति #देवीभजन #धार्मिकगीत #मनकीशांति @जय भीम @जय श्री कृष्णा @🙏जय श्री राम 🙏 🚩🚩 #जय माता दी सॉन्ग #राधे राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा #--- #बुद्ध #🙏Jai Mata Rani