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*🙏सादर वन्दे🙏*
*🚩धर्मयात्रा🚩*
*🎄 रंगनाथस्वामी मन्दिर , आदि रंगम , ( श्रीरंगपट्टनम ) 🎄*
*श्री रंगपट्टनम , इस शहर का नाम रंगनाथ स्वामी के नाम पर ही पड़ा है।*
श्रीरंगपट्टनम , मैसूर शहर से करीब 20 कि.मी.की दूरी पर बेंगलुरु के रास्ते पर है। कावेरी नदी के तट पर यह शहर स्थित है । रंगनाथस्वामी यानी भगवान विष्णु के मन्दिर को गंग वंश के राजाओं ने 894 ई. में बनवाया था। यहाँ भी पद्मनाभ स्वामी की तरह ही भगवान विष्णु की शेषनाग पर लेटी हुई मुर्ति है। रंगनाथ स्वामी का मन्दिर दक्षिण भारत के वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों में काफी महत्व रखता है। *मान्यता है कि भगवान विष्णु यहाँ आदि रंगम के रुप में विराजमान हैं।* रंगनाथ स्वामी मन्दिर में ग्रेनाइट केऊ कई बड़े -- बड़े स्तंभ देखे जा सकते हैं। मन्दिर मे , 24 भाव भंगिमाओं में , भगवान विष्णु की मूर्तियाँ दो स्तम्भों पर बनी हुई देखी जा सकती है ।
दक्षिण भारत के वैष्णव संप्रदाय में पंच रंगनाथ स्वामी की बड़ी मान्यता है जिन्हें पंच रंगक्षेत्रम के नाम से जाना जाता है। पांचों रंगनाथ स्वामी के मन्दिर अलग-अलग शहरों में कावेरी नदी के ही तट पर स्थित हैं। जिनमें श्रीरंगपट्टनम के रंगनाथ स्वामी आदि रंगम हैं। अगले चार मन्दिर , श्रीरंगम , कुंभकोणम , त्रिची औरू मायलादुताराई में देखे जा सकते हैं।
टीपू , श्री रंगनाथ स्वामी मन्दिर के पुजारियों का सम्मान करता था। एक बार पुजारियों ने टीपू सुल्तान के लिए एक भविष्यवाणी की थी कि अगर टीपू सुल्तान मन्दिर में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान करवाता है तो वह दक्षिण भारत का सुलतान बन सकता है।अंग्रेजों से एक बार युद्ध में विजय प्राप्त होने का श्रेय भी टीपू ने ज्योतिषों की उस सलाह को ही दिया था।
*मन्दिर में दर्शन का समय :--* मन्दिर सुबह आठ बजे से एक बजे तक और शाम को चार बजे से आठ बजे तक , दर्शन के लिए खुला रहता है। मन्दिर में दर्शन के लिए लम्बी भीड़ नहीं होती। दक्षिण भारत के अन्य मन्दिरों की ही तरह मन्दिर का अपना प्रसाद काउन्टर है।
*कैसे पहुँचे :--* बेंगलुरू से , श्री रंगपट्टनम करीब 125 कि.मी. और मैसूर से इसकी दूरी करीब 20 कि.मी. ही है।
*🙏आप जब भी बेंगलुरु और मैसूर जाएँ तो रंगनाथ स्वामी मन्दिर के दर्शन अवश्य करें ।🙏*
*🚩धर्मयात्रा🚩 हेतु आप भी जुड़ सकते है ----*
*🙏शिव🙏9993339605*
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#मंदिर दर्शन