Irfan shaikh
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भगवान विश्वकर्मा: सृष्टि के दिव्य वास्तुकार और शिल्पी भगवान विश्वकर्मा हिंदू धर्म में सृजन और निर्माण के देवता माने जाते हैं। उन्हें देवताओं का वास्तुकार और शिल्पी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने ही सोने की लंका, द्वारका, और हस्तिनापुर जैसे महत्वपूर्ण नगरों का निर्माण किया था। साथ ही, देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र-शस्त्र भी उनके द्वारा ही बनाए गए थे। उत्पत्ति और वंश: भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न ग्रंथ अलग-अलग मान्यताएं प्रस्तुत करते हैं। कुछ ग्रंथों में उन्हें ब्रह्मा जी का मानस पुत्र कहा गया है, जबकि अन्य में वे भगवान ब्रह्मा के वंशज, वास्तुदेव के पुत्र और प्रभास के भी पुत्र माने जाते हैं। उन्हें वैदिक देवता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। महत्व और पूजा: भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। वे यंत्रों के अधिष्ठाता हैं और माना जाता है कि उन्होंने ही यंत्र निर्माण विद्या का उपदेश दिया। इसीलिए, शिल्पकार, कारीगर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, और निर्माण से जुड़े अन्य व्यवसायों के लोग उन्हें विशेष रूप से पूजते हैं। विश्वकर्मा पूजा (जिसे विश्वकर्मा जयंती या विश्वकर्मा दिवस भी कहते हैं) हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। यह तिथि आमतौर पर 16 या 17 सितंबर को पड़ती है। इस दिन लोग अपने कार्यस्थलों, मशीनों, औजारों और वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन इन उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उनकी पूजा करने से कार्य में कुशलता, प्रगति और समृद्धि आती है। इस पावन अवसर पर, कार्यस्थलों को सजाया जाता है और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। प्रसाद बांटा जाता है और कई स्थानों पर सामुदायिक भोज का भी आयोजन होता है। यह दिन कर्मयोग के आदर्श को भी दर्शाता है, जिसमें व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति निष्ठा और समर्पण रखता है। #भगवान विश्वकर्मा #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #aaj ki taaja khabar