Irfan shaikh
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4 months ago
वामन जयंती हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, भगवान वामन के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान वामन की कथा पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्य राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। उसके अहंकार को तोड़ने और देवताओं को उनका अधिकार वापस दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने एक छोटे ब्राह्मण बालक (वामन) का रूप धारण किया। वामन भगवान बलि के पास गए और उनसे केवल 'तीन पग' भूमि दान में मांगी। बलि ने उनका उपहास किया और कहा कि वे उससे कुछ भी मांग सकते थे, लेकिन वामन ने केवल तीन पग भूमि मांगी। बलि ने हंसते हुए यह दान स्वीकार कर लिया। तब वामन भगवान ने अपना विराट रूप धारण किया। पहले पग में उन्होंने पूरी पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग में उन्होंने पूरे आकाश को नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई जगह नहीं बची, तो बलि ने अपना अहंकार त्याग कर अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। वामन भगवान ने तीसरे पग से बलि को पाताल लोक भेज दिया और उसे आशीर्वाद दिया कि वह वहां का राजा बना रहेगा। वामन जयंती का महत्व वामन जयंती का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और अहंकार के नाश का प्रतीक है। इस दिन भगवान वामन की पूजा करने से भक्तों को अहंकार से मुक्ति मिलती है और वे विनम्रता का पाठ सीखते हैं। यह त्योहार यह भी सिखाता है कि दान हमेशा सच्ची भावना से करना चाहिए। वामन जयंती कैसे मनाते हैं? इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करते हैं। घरों और मंदिरों में भगवान वामन की प्रतिमा स्थापित की जाती है और उनकी आरती की जाती है। इस दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। कई जगहों पर भगवान वामन की कथा और उपदेशों का पाठ किया जाता है। #वामन जयंती #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #aaj ki taaja khabar