Irfan shaikh
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निश्चित रूप से, मैं आपको शनि प्रदोष व्रत के बारे में पूरी जानकारी देता हूँ। शनि प्रदोष व्रत क्या है? शनि प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि (तेरहवीं तिथि) को रखा जाता है और यह भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। जब यह त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत या शनि त्रयोदशी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की पूजा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि शनि देव को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है और शिवजी ने ही उन्हें न्याय का अधिकार दिया है। महत्व शनि प्रदोष व्रत का महत्व बहुत अधिक माना जाता है, खासकर: संतान प्राप्ति: यह व्रत संतान सुख की कामना रखने वाले निसंतान दंपत्तियों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। शनि दोष से मुक्ति: यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या किसी अन्य शनि दोष से पीड़ित हैं। इस व्रत को करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। सुख-समृद्धि और दीर्घायु: इस व्रत को करने से जीवन में सुख, सौभाग्य, समृद्धि और आरोग्य (उत्तम स्वास्थ्य) की प्राप्ति होती है। पापों का नाश: सच्चे मन से व्रत करने पर सभी प्रकार के कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं। पूजा विधि शनि प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में (यानी सूर्यास्त के समय के आस-पास) की जाती है। स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ नीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। शिव पूजा (प्रदोष काल में): प्रदोष काल में फिर से स्नान कर या हाथ-पैर धोकर पूजा स्थल को शुद्ध करें। शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार के फूल और चंदन का तिलक अर्पित करें। माता पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करें। घी का दीपक और धूप जलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें। शनि देव की पूजा: शिव पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि देव को काले तिल, तेल और उड़द दाल अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। दान: व्रत का पारण करने से पहले जरूरतमंद को अनाज, वस्त्र या तेल का दान अवश्य करें। शनि प्रदोष व्रत में क्या करें और क्या न करें? क्या करें (शुभ कार्य) क्या न करें (वर्जित कार्य) पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। इस दिन किसी भी जीव-जंतु को कष्ट न पहुंचाएं। काले तिल और सरसों के तेल का दान करें। झूठ न बोलें और किसी का अपमान न करें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बाल या नाखून काटने से बचें। रुद्राष्टक या शिव चालीसा का पाठ करें। दिन के समय सोने से बचें। क्या आप किसी विशेष महीने के शनि प्रदोष व्रत की तिथि जानना चाहेंगे? #शनि प्रदोष व्रत #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #aaj ki taaja khabar