रोहणः आत्रेयः
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4 months ago
लोक की रक्षा करने में समर्थ होना, साहसी होना, इंद्रियों की इच्छाओं को नियंत्रित करने में सक्षम होना, पराक्रमी होना तथा सज्जनों का सम्मान करना और दुर्जनों को दंड देना क्षत्रिय के स्वाभाविक गुण हैं। अर्थात्, इन गुणों वाले व्यक्तियों को क्षत्रिय कहा जा सकता है। लोकसंरक्षणे दक्षः शूरो दान्तः पराक्रमी। दुष्टनिग्रहशीलो यः स वै क्षत्रिय उच्यते ॥ #🎶शिव भजन🔱 #परमपिता परमात्मा शिव बाबा लव यू