रूप में परिपूर्ण अर्थात् सुंदर या सुंदरी, यौवन अवस्था में अर्थात् तरुण या तरुणी, और समृद्ध परिवार में जन्मे व्यक्ति भी, यदि विद्या से रहित हों, तो वे सुगंधहीन किंशुक फूल की तरह शोभाहीन होते हैं।
रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः ।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥
#🎶शिव भजन🔱 #परमपिता परमात्मा शिव बाबा लव यू