kaushik Samarjeet Singh "Raaz"
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#VoteChori #Rahul Gandhi Inc #rahulgandhi " राहुल को कांग्रेस मत समझो।" प्रिय जनता, हम अक्सर इतिहास को ऐसे पढ़ते हैं जैसे किसी ने हमारे सामने एक तैयार तस्वीर रख दी हो–रंग भरे हुए, फ्रेम में जड़ी हुई–और हम उसी तस्वीर को सच मान लेते हैं। लेकिन सच हमेशा किसी एक तस्वीर में कैद नहीं होता, वो तो कई परतों में छुपा होता है। कांग्रेस ने लाख गलतियां की होंगी। सत्ता के नशे में कई फैसले ऐसे लिए होंगे, जिन्होंने देश को निराश किया, लोगों का भरोसा तोड़ा। ये सब सच है, और इसे नकारना बेईमानी होगी। लेकिन तब, राहुल गांधी कांग्रेस में नहीं थे। तब वो बच्चा था–एक ऐसा बच्चा, जो शायद इस देश के बाकी बच्चों की तरह, अपने परिवार की राजनीति से दूर, अपने बचपन में खोया था। अब सवाल ये है–क्या हम किसी बेटे को उसके बाप के गुनाहों का वारिस बना देंगे? क्या हम किसी को सिर्फ इसलिए दोषी मान लेंगे क्योंकि उसका नाम उस घर से जुड़ा है, जिसमें कभी गलती हुई थी? क्या हम आज के सूरज को बीते कल के अंधेरे का जिम्मेदार ठहरा सकते हैं? राहुल आज का राहुल है। उसका चेहरा, उसकी आंखों की थकान, और उसकी आवाज़ की जिद–सब कुछ एक अलग कहानी कहता है। वो किताब के वही पुराने पीले पन्ने नहीं है, जो कांग्रेस ने दशकों पहले लिखे थे। उसकी सांसों में एक और किस्म की बेचैनी है–सत्ता की भूख नहीं, बल्कि बदलाव की भूख। कांग्रेस अपनी जगह है–एक पुराना बरगद, जिसकी जड़ें धरती के अंदर तक फैली हैं, और जिसकी छांव में अच्छे-बुरे, दोनों मौसम गुजरे हैं। पर राहुल उस बरगद के नीचे उगने वाली एक नई कोंपल है, जो अपने ढंग से आसमान देखना चाहती है। प्रिय जनता, राहुल को कांग्रेस मत समझो। उसे उसकी अपनी यात्रा से परखो–उसके शब्दों से, उसके सवालों से, उसके गिरने और उठने की कोशिशों से। उसने संसद में खड़े होकर सत्ता से आंख मिलाई है, गलियों में जाकर किसानों, मजदूरों और छात्रों के बीच बैठा है। उसने ये दिखाने की कोशिश की है कि राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने का खेल नहीं, बल्कि लोगों की तकलीफ समझने की जिम्मेदारी भी है। हाँ, राहुल से भी गलतियां होंगी–क्योंकि वो इंसान है, और इंसान होने का मतलब ही है गलतियां करना और उनसे सीखना। लेकिन उसकी गलतियों को उसके इरादों के खिलाफ मत तौलना। क्योंकि राहुल अब राहुल है। और राहुल, सिर्फ एक नेता नहीं–वो जनता है। आपकी तरह, मेरी तरह। गलतियों से सीखता हुआ, उम्मीद से जीता हुआ। और अगर कभी आप उसे कोसना चाहें, तो पहले उसकी कहानी पढ़ लेना। हो सकता है, उसमें आपकी अपनी कहानी का एक पन्ना छुपा हो–वो पन्ना, जिसमें आपने भी अतीत के बोझ से मुक्त होकर, खुद को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश की हो। कितनी अजीब बात है न, कि हम किसी इंसान को उसकी अपनी कहानी से नहीं, बल्कि एक ऐसे पुराने घर के हिसाब से आंकते हैं, जिसमें वो कभी रहा ही नहीं था। ख़त लिखने वाला लड़का। . ##कौशिक-राज़... ✍️