vikas kumar sharma
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5 months ago
गुजरिया (कजरी) तीज और कजलिया दो अलग-अलग त्योहार हैं, लेकिन दोनों का नाम एक जैसा लगने के कारण लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। आइए दोनों के बारे में जानते हैं: कजरी तीज (गुजरिया तीज) यह उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और बिहार में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। इसे बड़ी तीज भी कहते हैं क्योंकि यह हरियाली तीज के 15 दिन बाद आती है। * महत्व: यह त्योहार विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर मनाती हैं। अविवाहित लड़कियाँ भी एक अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन देवी पार्वती की पूजा की जाती है। * प्रमुख अनुष्ठान: महिलाएं पूरे दिन बिना पानी पिए निर्जला व्रत रखती हैं। वे शाम को नीमड़ी माता (नीम के पेड़) की पूजा करती हैं और चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। पारंपरिक कजरी गीत गाए जाते हैं, और झूले डाले जाते हैं। * अन्य नाम: इसे बूढ़ी तीज और सतुड़ी तीज भी कहा जाता है, क्योंकि व्रत खोलने के लिए सत्तू से बने व्यंजन खाए जाते हैं। कजलिया यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक लोक पर्व है। इसे भुजरिया भी कहते हैं। * महत्व: यह त्योहार प्रकृति और नई फसल के आगमन का प्रतीक है। यह भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान को दर्शाता है। * प्रमुख अनुष्ठान: यह त्योहार रक्षाबंधन के अगले दिन मनाया जाता है। नागपंचमी के आसपास बाँस की छोटी टोकरियों में मिट्टी भरकर गेहूं या जौ के बीज बोए जाते हैं। रक्षाबंधन तक इन पौधों की देखभाल की जाती है और उन्हें पानी दिया जाता है। रक्षाबंधन के अगले दिन इन नन्हे पौधों को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। लोग एक-दूसरे को कजलियां भेंट करके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस तरह, कजरी तीज पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख से जुड़ा त्योहार है, जबकि कजलिया मुख्य रूप से प्रकृति, फसल और भाईचारे का पर्व है। #कजलियां पर्व की बधाई #festival