Rajnee Gupta
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1 days ago
दूसरों की नज़रों में अच्छा दिखने की कोशिश में हम अक्सर अपनी भावनाओं, मूल्यों और सच्चाई से समझौता कर बैठते हैं। लेकिन बाहरी प्रशंसा से मिलने वाली खुशी क्षणिक होती है, जबकि आत्म-सम्मान से मिलने वाली शांति स्थायी होती है। हर दिन स्वयं से एक प्रश्न पूछें... क्या मैं वही हूँ, जो मैं लोगों को दिखाई देता हूँ? यदि हमारा विचार, वाणी और कर्म एक जैसे हैं, तो हमें किसी प्रमाणपत्र या स्वीकृति की आवश्यकता नहीं। दुनिया आपको समझे या न समझे, स्वीकार करे या न करे, लेकिन यदि आप अपनी नज़रों में सच्चे हैं, तो आप सही दिशा में हैं। क्योंकि चरित्र की मजबूती, छवि की चमक से कहीं अधिक मूल्यवान है। #📃लाइफ कोट्स ✒️