Sagar Saini
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6 hours ago
#GodMorningSaturday #शराब_पीना_महापाप . देते को हर देत है कबीर, देते को हर देत है, जहां तहां से आन। नही तो मांगते फिरो, साहिब सुने ना कान।। कबीर साहिब जी कहते हैं कि जो व्यक्ति उचित पात्र को दानधर्म करता है, परमात्मा उसको हजारो गुणा लौटाते है। जो व्यक्ति दान धर्म नही करता उसको उस परमात्मा के दरवार से कुछ नही मिलता। हम देखते कि एक बच्चे का जन्म विश्व के बडे बडे घरानों मे होता है। बच्चा पैदा होते ही अरब खरब का मालिक हो जाता है। उसने जन्म के साथ नही कमाया और ना ही कोई ऐसा धर्म पुन किया। ये उसके पिछले जन्मों मे किये सद्कर्म और दान है जो अब जन्म के साथ ही राजा महाराज जैसे ठाट-बाट है। एक अन्य उदाहरण मे बताते है कि एक झुपड झोपड़ी मे पैदा बच्चा मा की गोद मे होता है और मा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, या अन्य धार्मिक स्थलों पर भीख मांगती है। जब बच्चा छ- सात महिने का होता है तब मा के साथ हाथ निकाल कर भीख मांगनी शुरू कर देता है।उस बच्चे ने इस जन्म मे ऐसा पाप नही किया कि उसे भीख मांगनी पडे। ये सब पुर्व जन्म के किये कर्म का फल है। मनुष्य जन्म दो तरह से मिलते है। एक लख चौरासी योनि भुगतने के बाद मनुष्य जन्म मिलता है। एक पिछले जन्मों मे किये धर्म पुन्य व सद्भक्ति व सद्कर्म से मिलता है। जन्म मे पाप पुन्य की अनुपात से मनुष्य जीवन का लेखा जोखा लिखा जाता है। उसी के आधार पर जीवन जीता है। और अपने हिसाब से कर्म करता है। संत रामपाल जी महाराज कहते है कि जब मनुष्य को यदि सच्चा सतगुरू जो शाशत्रानुकुल साधना करवाये मिल जाता है तो उसके सभी पाप कर्म का खात्मा कर देता है। सतगुरु उस परमात्मा की प्राप्ति के लिये सद्भक्ति करवाता है। उससे संसारिक सुख मिलते है। कर्म भ्रम ब्रह्माण्ड के , फल मे कर दू नेश। जिन हमरी दुहाई दी, करो हमारे पेश।। सतगुरु की शरण ना मिले और पिछले जन्मों मे सद्भक्ति, सद्कर्म किये नही तो उसकी ऐसी हालात होती है जैसे साउथ अफ्रीका के इस बच्चे की है। फोटोग्राफर फोटो बनाते है मैगजीन मे छपती है। फोटोग्राफर को इनाम मिलता है मगर उस बच्चे का क्या मिला? यह तस्वीर याद है आपको? इसे नाम दिया गया था “The vulture and the little girl ” । इस तस्वीर में एक गिद्ध भूख से मर रही एक छोटी लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा है । इसे एक साउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर ने 1993 में सूडान के अकाल के समय खींचा था। और इसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। लेकिन कार्टर इस सम्मान का आनंद कुछ ही दिन उठा पाए क्योंकि कुछ महीनों बाद 33 वर्ष की आयु में उन्होंने अवसाद से आत्महत्या कर ली । क्या हुआ? दरअसल जब वे इस सम्मान का जश्न मना रहे थे तो सारी दुनिया में प्रमुख चैनल और नेटवर्क पर इसकी चर्चा हो रही थी । उनका अवसाद तब शुरू हुआ जब एक ‘फोन इंटरव्यू’ के दौरान किसी ने पूछा कि उस लड़की का क्या हुआ? कार्टर ने कहा कि वह देखने के लिए रुके नहीं क्यों कि उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी। इस पर उस व्यक्ति ने कहा ” मैं आपको बता रहा हूँ कि उस दिन वहां दो गिद्ध थे जिसमें एक के हाथ में कैमरा था।” इस कथन के भाव ने कार्टर को इतना विचलित कर दिया कि वे अवसाद में चले गये और अंत में आत्महत्या कर ली। किसी भी स्थिति में कुछ हासिल करने से पहले मानवता आनी ही चाहिए। कार्टर आज जीवित होते अगर वे उस बच्ची को उठा कर यूनाईटेड नेशन्स के फीडिंग सेंटर तक पहुंचा देते जहां पहुंचने की वह कोशिश कर रही थी। भारतीय मीडिया न्यूज़ चैनलों से अरबों खरबों रुपए कमाते हैं वह इन प्रवासी श्रमिकों की केवल वीडियो बना रहे हैं न्यूज़ बना रहे हैं लेकिन उन्होंने किसी एक की भी सहायता नहीं की भारतीय मीडिया के गिद्धों को समर्पित Sa True Story YouTube #शराब_पीना_महापाप