#भक्ति
।।श्रीहरि:।।🌺
⭐ *भक्तिका स्वरूप - श्रीहनुमान जी महाराज*
♦️अपने-आपको *सर्वथा भगवान्के समर्पित* कर देना, उनके मनोभाव, प्रेरणा, अथवा आज्ञाके अनुसार उनकी *सेवा करना, उनको निरन्तर सुख पहुँचानेका भाव रखना तथा बदलेमें उनसे कभी कुछ न चाहना*-- यही *भक्तिका स्वरूप है*।
ये सब बातें हनुमान् जीमें *पूर्णरूपसे* पायी जाती हैं।
🔸वे अपने शरीर, इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, बल, योग्यता, समय आदिको *एकमात्र भगवान्का* ही समझकर उनकी सेवामें लगाये रखते हैं। *उनका पूरा जीवन ही भगवान्को सुख पहुँचानेके भावसे ओत-प्रोत है।*
नारायण! नारायण! नारायण! नारायण!