क्या आप जानते हैं? प्राचीन भारत का अपना 'TOEFL' था! 🎓📜
आज अगर हमें विदेश पढ़ने जाना हो, तो हम IELTS या TOEFL जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन सदियों पहले, दुनिया भारत की ओर देखती थी! 🌍✨
नालंदा का गौरव: जब चीनी यात्री ह्वेन सांग (Hiuen Tsang) भारत आए, तो नालंदा विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना आज के Ivy League कॉलेजों से भी कठिन था।
संस्कृत: वैश्विक भाषा:
उस समय शिक्षा का माध्यम संस्कृत था। ह्वेन सांग और फा-ह्यान जैसे विद्वानों को पहले इस कठिन भाषा में महारत हासिल करनी पड़ी ताकि वे दर्शन और विज्ञान की गूढ़ बातों को समझ सकें।
हाल ही में एक चीनी फिल्म में ह्वेन सांग को धाराप्रवाह संस्कृत बोलते दिखाया गया है, जो हमारी भाषाई विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
भारत केवल मसालों का देश नहीं, बल्कि ज्ञान का वैश्विक केंद्र (Global Hub) रहा है। हमारी जड़ें बहुत गहरी हैं! 🌱🇮🇳
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