
विजय नगरकर Vijay Nagarkar
@vipranagarkar
हिंदी,मराठी, साहित्य, अनुवाद, संगीत, संस्कृत
*सचित्र संत महिपती ताहराबादकर*
संत महिपती महाराजांनी देशभ्रमण करून महाराष्ट्राबाहेरील ११६ आणि महाराष्ट्रातील १६८ संतांची चरित्रे सुबोध व रसाळ वाणीत लिहून प्राचीन मराठी साहित्याचे भांडार समृद्ध केले, त्यांच्या या अलौकिक कार्याला या सचित्र पुस्तकाद्वारे लोकांपर्यंत पोहोचवण्याचा प्रयत्न करण्यात आला आहे.
माझे हे पुस्तक सध्या उपलब्ध नाही.
प्रकाशकाने व्यवसाय बंद केला आहे. पुस्तकाचे अधिकार माझ्याकडे आहेत.
संत महिपती यांच्या कार्याची माहिती युवा पिढीला सचित्र पुस्तका द्वारे देण्यात यावी हा हेतू होता.
डिजिटल युगात युवा पिढी ईबुक मोबाईल वर वाचण्यास अग्रक्रम देतात. त्यामुळे पुस्तक मोफत Archive Internet या जागतिक डिजिटल प्लॅटफॉर्म वर मी उपलब्ध करून दिले आहे.
पुस्तिका विषयी :
पुस्तकाचे नाव: सचित्र संत महिपती ताहराबादकर
लेखक / संकल्पना: विजय प्रभाकर नगरकर
चित्रकार: वसंत विटणकर
प्रकाशक: बुकमीडिया पब्लिशिंग हाऊस (BookMedia Publishing House), पॉंडिचेरी, ६०५००१, भारत
प्रकाशन वर्ष (कॉपीराईट): २०२०
ISBN क्रमांक: 978-81-949137-0-2
पुस्तकाचे विवरण (Description):
उद्देश आणि स्वरूप: हे एक सचित्र ई-पुस्तक (e-book) आहे, ज्यामध्ये महान संत चरित्रकार 'श्री महिपती ताहराबादकर' यांच्या जीवनकार्यावर आधारित आकर्षक चित्रमय मालिका (कॉमिक स्वरूपात) सादर करण्यात आली आहे.
नवीन पिढीसाठी निर्मिती: आजच्या नवीन पिढीला इंटरनेट आणि मोबाईलच्या माध्यमातून संत महिपती महाराजांच्या महान कार्याचा परिचय सहज व्हावा, या उद्देशाने हे पुस्तक प्रकाशित करण्यात आले आहे
चित्रांकन: या पुस्तकातील सर्व सुरेख आणि आकर्षक चित्रे अहिल्यानगरचे सुप्रसिद्ध चित्रकार श्री. वसंत विटणकर यांनी अथक परिश्रमाने रेखाटली आहेत.
पुस्तक खालील लिंक वर मोफत उपलब्ध आहे.आपण ऑनलाईन वाचू शकता अथवा ईबुक,pdf डाउनलोड करू शकता.
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*विजय प्रभाकर नगरकर*
अहिल्यानगर महाराष्ट्र
(संत महिपती महाराज परिवार सदस्य)
vpnagarkar@gmail.com #संत #विठ्ठल #वारकरी #धर्म
https://archive.org/details/sachitra-sant-mahipati
"सिलेंडर"
एक आदमी
राजनीति की आग लगता है
एक आदमी अपना चूल्हा जलाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न आग लगाता है, न चूल्हा जलाता है
वह सिर्फ़ चूल्हे से खेलता है
मैं पूछता हूँ—
‘यह तीसरा आदमी कौन है?’
मेरे देश की संसद मौन है।
(स्व धूमिल से क्षमा मांगते हुए)
© विजय नगरकर
#गैस
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एलन मस्क के कृत्रिम बुद्धि आधारित ग्रोक ने अब विकिपीडिया के तर्ज पर ग्रोकपीडिया का निर्माण किया है ।
मेरे लिए यह गौरव है कि मेरा इंग्रजी में परिचय ग्रोकपीडिया में शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन 20 लिंक का संदर्भ भी दिया गया है।
( लिंक कमेंट बॉक्स में प्रदान की गई है)
https://grokipedia.com/page/Vijay_Prabhakar_Nagarkar #😇 चाणक्य नीति #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘
"हिंदी के विकास में हिंदीतर"
जयराम फगरे: हिंदी प्रचार-प्रसार को समर्पित एक 'कर्मयोगी'
हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए अपना संपूर्ण जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित करने वाले श्री जयराम फगरे भारतीय भाषाई सेवा के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, पुणे के निदेशक के रूप में कार्यरत श्री फगरे ने आज (12 जनवरी, 2026) अपने जीवन के 96वें वर्ष में कदम रखा है। उनके इस दीर्घायु और कर्मठ जीवन का उद्देश्य केवल और केवल हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुँचाना रहा है।
जीवन परिचय और प्रारंभिक संघर्ष
जयराम फगरे का जन्म 12 जनवरी, 1931 को रत्नागिरी जिले के मूर्तवंडे गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा और कर्मभूमि पुणे रही, जहाँ उनकी नियुक्ति नूतन मराठी विद्यालय (N.M.V.) में हिंदी शिक्षक के रूप में हुई। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने न केवल छात्रों को भाषा सिखाई, बल्कि अपने संगठन कौशल के बल पर शिक्षक आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। उनके व्यक्तित्व पर स्वामी विवेकानंद, कर्मवीर भाऊराव पाटिल और महात्मा गांधी के विचारों का गहरा प्रभाव है।
हिंदी के लिए संगठनात्मक योगदान
जयराम फगरे का नाम महाराष्ट्र में हिंदी प्रचार के पर्याय के रूप में जाना जाता है।
उनके संगठनात्मक कार्यों की यात्रा मुख्य रूप से निम्नलिखित पड़ावों से गुजरी है:
* राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा: वर्ष 1966 में वे वर्धा स्थित इस प्रतिष्ठित समिति की कार्यकारिणी के सदस्य चुने गए।
* निदेशक पद: वर्ष 2001 में उन्होंने महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, पुणे के संचालक (निदेशक) के रूप में पदभार संभाला।
* परीक्षा और कार्यशालाएँ: उन्होंने महाराष्ट्र के अनेक जिलों के स्कूलों का दौरा कर समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली हिंदी परीक्षाओं का प्रचार किया। आज उनके प्रयासों से हजारों विद्यार्थी हिंदी की परीक्षा देते हैं। वे प्रतिवर्ष हिंदी शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी करते हैं।
* हिंदी साहित्य सम्मेलन: वर्ष 2003 में पुणे में उनके नेतृत्व में एक विशाल हिंदी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने एक हजार पूर्व छात्रों को आमंत्रित कर हिंदी के प्रति नई चेतना जागृत की थी।
प्रकाशित पुस्तकें और संपादन
साहित्यिक और शैक्षिक क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया है:
* ऊर्जावान विभूतियाँ (Urjavan Vibhutiyan)
* बापू की बातें (Bapu ki Baatein)
* मराठी-हिंदी शब्दकोश (एक अत्यंत उपयोगी भाषाई सेतु)
इसके अतिरिक्त, वे समिति द्वारा प्रकाशित होने वाली द्वैमासिक पत्रिका 'समिति संवाद' के संपादक के रूप में भी कार्य देख रहे हैं।
पुरस्कार और सम्मान
हिंदी के प्रति उनकी निष्ठा और सेवाओं को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है:
* पुणे महानगरपालिका द्वारा 'आदर्श शिक्षक पुरस्कार'।
* मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल द्वारा 'हिंदी सेवा' पुरस्कार।
* हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा विशेष पुरस्कार।
* साहित्य सम्मेलन का 'हिंदी गौरव पुरस्कार'।
* शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के हाथों 'जीवन गौरव पुरस्कार' (Life Time Achievement Award)।
* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे प्रवास के दौरान उन्हें 'पुणेरी पगड़ी' पहनाकर सम्मानित किया था।
निष्कर्ष
96 वर्ष की आयु में भी जयराम फगरे का उत्साह युवाओं जैसा है। वे आज भी नियमित रूप से समिति के पुणे कार्यालय में उपस्थित रहकर अपना कार्य करते हैं। उनका जीवन अनुशासन, संयम, विनम्रता और हिंदी के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है। महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी संस्कृतियों को जोड़ने में उनकी भूमिका एक सेतु के समान है।
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Jayram Fagare जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ,सर 💐🙏 #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #📓 हिंदी साहित्य #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡
" मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले गैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का साहित्य,संगीत,कला का सम्मान किया है।
क्या हम आज भाषा का दुराग्रह पालते हुए भाषा के गुंडों की फौज खड़ी कर रहे है?"
~ विजय नगरकर
🌍 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ विश्व हिन्दी दिवस (10 जनवरी 2026) के पावन अवसर पर हुआ।
दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और प्रेरक वक्तव्यों के साथ यह उत्सव मातृभाषाओं की सांस्कृतिक एकता और भावनात्मक शक्ति का जीवंत प्रतीक बन गया।
🎤 उपाध्यक्ष अचला भूपेन्द्र जी के स्वागत भाषण से शुरुआत हुई, अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार जी ने मातृभाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रतियोगिताओं की घोषणा की।
📚 सचिव समीक्षा तैलंग जी ने परिचर्चा का संचालन करते हुए मातृभाषा को हमारी पहचान का आधार बताया।
🌟 विशिष्ट अतिथियों डॉ. साधना बलवटे जी और वरिष्ठ लेखक- अनुवादक विजय प्रभाकर नगरकर जी ने अपने अनुभवों से प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
🎶 इस छह सप्ताह के उत्सव में 22 भारतीय भाषाओं में 150+ प्रतियोगिताएँ होंगी –
लोकगीत, लोकनृत्य, भाषण, सुलेख, चित्रकला, कविता पाठ, कहानी लेखन, परिचर्चाएँ और बहुत कुछ!
यह मंच हर आयु वर्ग के लिए खुला है – जहाँ हर कोई अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता है।
🌿 थीम 2026: “मातृभाषा आधार जहाँ, हर भाषा उपहार वहाँ”
(Where Mother Language Roots, All Languages Bloom)
🙏 उद्घाटन समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, और यह आयोजन मातृभाषाओं को संरक्षित व प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ।
💫 आइए, इस उत्सव का हिस्सा बनें और अपनी मातृभाषा की धरोहर को नई पीढ़ियों तक पहुँचाएँ!
🔖 सहयोगी संस्थाएँ: Sustainable Future Foundation | Global Shakti Forum | WICCI NRI Council | Navchetna Patrika | राजस्थानी लेखिका संगठन
https://www.youtube.com/live/HODUmE7_VA8?si=JBf_HYlnb2J7Id7W #📓 हिंदी साहित्य #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस #मातृभाषा
#🙏संत तुकाराम महाराज #जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज बीज हार्दिक शुभेच्छा #संत तुकाराम महाराज बीज 🚩 देहू











