#जय मां लक्ष्मी
माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले अनेक स्तोत्रों में “इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र” अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि जब देवराज इंद्र अपने ऐश्वर्य, वैभव और स्वर्ग की समृद्धि खो बैठे, तब उन्होंने श्रद्धा और भक्ति से माता लक्ष्मी की आराधना की। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर महालक्ष्मी ने पुनः इंद्र को धन, वैभव, यश और सुख प्रदान किया। इसी कारण यह स्तोत्र दरिद्रता, आर्थिक बाधा, अशांति और दुर्भाग्य को दूर करने वाला माना जाता है।
यह स्तोत्र विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया तथा प्रतिदिन प्रातः या संध्या समय पढ़ना शुभ माना जाता है। कमलगट्टे की माला, घी का दीपक और माता लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध भाव से इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
॥ इंद्र कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र ॥
नमस्ते सर्वलोकानां जननीमब्जसंभवाम्।
श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥
पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्।
वन्दे पद्ममुखीं देवीं पद्मनाभप्रियामहम्॥
त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनी।
संध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती॥
यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने।
आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी॥
आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च।
सौम्या सौम्यैर्जगत्पूज्या त्वयैतद्देवि पूरितम्॥
का त्वन्या त्वामृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः।
अध्यास्ते देवदेवस्य योगिचिन्त्यं गदाभृतः॥
त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम्।
विनष्टप्रायमभवत् त्वयेदानीं समेधितम्॥
दाराः पुत्रास्तथा गेहं सुहृद्दान्यधनादिकम्।
भवत्येतन्महाभागे नित्यं त्वद्वीक्षणान्नृणाम्॥
शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयो सुखम्।
देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥
त्वं माता सर्वलोकानां देवदेवो हरिः पिता।
त्वयैतद्विष्णुना चाम्ब जगद्व्याप्तं चराचरम्॥
मा नः कोशं तथा गोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम्।
मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथा: सर्वपावनि॥
मा पुत्रान्मा सुहृद्वर्गान्मा पशून्मा विभूषणम्।
त्यजेथा मम देवस्य विष्णोर्वक्षःस्थले स्थिता॥
सत्त्वेन सत्यशौचाभ्यां तथा शीलादिभिर्गुणैः।
त्यजन्ते ते नराः सद्यः सन्त्यक्ता ये त्वयामले॥
त्वयावलोकिताः सद्यः शीलाद्यैरखिलैर्गुणैः।
कुलैश्वर्यैश्च युज्यन्ते पुरुषा निर्गुणा अपि॥
स ब्रह्मा स शिवः सेन्द्रः सोऽग्निः स वरुणोऽनिलः।
स सूर्यः स च सोमश्च स धन्यः स च पण्डितः॥
स्तोत्र के लाभ
इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ जीवन में धन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य को आकर्षित करने वाला माना गया है। जिन लोगों के कार्य बार-बार रुकते हों, व्यापार में हानि हो रही हो, घर में आर्थिक तंगी बनी रहती हो या मानसिक अशांति रहती हो, उनके लिए यह स्तोत्र अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस स्तोत्र के प्रभाव से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है तथा माता लक्ष्मी की कृपा से धन के नए मार्ग खुलने लगते हैं। यह केवल भौतिक सुख ही नहीं देता, अपितु मन में शांति, संतोष और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है।
कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और पवित्रता से इसका पाठ करता है, उसके जीवन में मान-सम्मान, यश, वैभव और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। माता लक्ष्मी की कृपा से व्यापार, नौकरी और धन संबंधी बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
विशेष रूप से दीपावली, शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन इसका पाठ करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि कमल पुष्प, शंख, धूप और घी के दीपक के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करके यह स्तोत्र पढ़ा जाए, तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।