एक बार देवताओं और ऋषियों के बीच यह विवाद छिड़ गया कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश — इन तीनों में सबसे महान कौन है। 🤔
तब सभी ने निर्णय लिया कि महर्षि भृगु इस रहस्य का पता लगाएंगे, क्योंकि वे महान तपस्वी और तेजस्वी ऋषि थे। 🕉️
सबसे पहले भृगु ऋषि ब्रह्मलोक पहुँचे। वहाँ ब्रह्मा जी ने उनका उचित सम्मान नहीं किया, जिससे ऋषि क्रोधित हो गए। फिर वे कैलाश पहुँचे, जहाँ शिवजी उन्हें गले लगाने आए, लेकिन भृगु ने इसे अपमान समझ लिया और वहाँ से चले गए। 😨
अंत में वे वैकुण्ठ पहुँचे, जहाँ भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की गोद में विश्राम कर रहे थे।
भृगु ऋषि को लगा कि विष्णु भी उनका आदर नहीं कर रहे हैं। क्रोध में आकर उन्होंने भगवान विष्णु की छाती पर लात मार दी! 😳
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे ब्रह्मांड को चौंका दिया।
भगवान विष्णु क्रोधित होने के बजाय तुरंत उठे और बोले —
“हे ऋषिवर, आपके कोमल चरणों को मेरी कठोर छाती से चोट तो नहीं लगी?” 🙏
यह सुनकर भृगु ऋषि की आँखें खुल गईं। उन्हें समझ आ गया कि भगवान विष्णु सबसे अधिक विनम्र, क्षमाशील और करुणामयी हैं। तभी उन्होंने विष्णु को त्रिदेवों में श्रेष्ठ घोषित किया। 🔱
कहा जाता है कि भृगु ऋषि के चरणों का निशान आज भी भगवान विष्णु की छाती पर श्रीवत्स चिन्ह के रूप में माना जाता है। 🌺
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