M P SINGH
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M P SINGH
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जय श्रीकृष्ण🙏राधे राधे🙏
!! तुम्हारी शिकायते, मेरा इश्क़ !! ये यकीं का ही तो एक हसीन सिलसिला है, तभी तो इस दिल को तेरे पास लाया है मैंने..!! न बेवजह कोई अरमान जगाया है मैंने, तुझे रूह की गहराई में बसाया है मैंने..!! मेरी फितरत में नहीं बीच राह से मुड़ जाना, तेरी धड़कन को अपना मक़ाम बनाया है मैंने...!! ये जो इल्ज़ाम है कि मैं आ कर चली जाऊँगी, तेरे सीने में खुद को धड़कन सा छुपाया है मैंने...!! सिर्फ लफ्ज़ों से उम्रभर का वादा नहीं करती, तुझे अपनी हर दुआ में मांग कर पाया है मैंने..!! जमाने के सामने तुझपे हक यूँही नहीं जताती, तुझे अपनी हर साँस का हिस्सा बनाया है मैंने..!! बेबाक है मेरा इश्क़, कोई पर्दा नहीं अब इसमें, तेरी बाहों की तपिश में खुद को पिघलाया है मैंने...!! जब चूमती है तेरी नज़रें मेरी इन आँखों को, हया की हर एक हद को खुशी से मिटाया है मैंने...!! तेरी आँखों में नमी देख कर मेरी जान निकलती है, तुम्हें रुलाने का ख्वाब भला कब सजाया है मैंने ? आ मेरे सीने से लग जा, सारे गिले भूल कर अब, तेरी एक मुस्कुराहट पे अपना सब कुछ लुटाया है मैंने...!! ये यकीं का ही तो एक हसीन सिलसिला है, तभी तो इस दिल को तेरे पास लाया है मैंने..!! #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं कि बिना तुलसी के वे करोड़ों व्यंजनों को भी स्वीकार नहीं करते, क्योंकि तुलसी में उनकी आह्लादिनी शक्ति श्री राधा का वास है। मान्यता है कि तुलसी के हर पत्ते पर सूक्ष्म रूप से 'राधा' नाम अंकित होता है, और यही कारण है कि कृष्ण उसे देखते ही तृप्त हो जाते हैं। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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बस दूर होकर भी दूरी ना लगे, इतना अपनापन बनाए रखना… फासले चाहे जितने भी हों दरमियाँ, दिल से दिल का रास्ता खुला ही रखना… नाम चाहे दोस्ती का हो या प्यार का, पर एहसासों को सच्चा ही रखना… जब कभी यादों की हवा छूकर गुज़रे, मुस्कुराहट में मेरा हिस्सा बचाए रखना… रिश्ता शब्दों से नहीं, विश्वास से जीता है, बस इस विश्वास को ज़िंदा बनाए रखना #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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हर हर महादेव शम्भो, त्रिपुरारी देव दयाल। भस्म रमाए गंगाधर, कर दो जीवन निहाल॥ नागेन्द्र हार विभूषित, जटा में गंगा धारे। चन्द्र विराजे शिर पर, भक्तों के दुःख हारे॥ नीलकंठ हे कृपालु, करुणा सागर अपार। तेरी शरण जो आए, उसका हो उद्धार॥ डमरू की नाद गूंजे, तन-मन हो पावन। शिव नाम सुमिरन करते, कटते भव के बंधन॥ ॐ नमः शिवाय🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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माएं चक्र सी होती हैं, उनके भीतर सृजन, पोषण और परिवर्तन निरंतर घूमता है.. माएं प्रयाग सी होती हैं, उनपे आ कर सारे रिश्तों का संगम होता है.. #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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तुलसी पावस के समय, धरी कोकिलन मौन अब तो दादुर बोलिहं, हमें पूछिह कौंन ​वर्षा ऋतु आने पर कोयल मौन धारण कर लेती हैवह सोचती है कि अब तो मेंढक टर्राएंगे, तो हमारी सुरीली आवाज को कौन पूछेगा ? अर्थात जहाँ गुणहीनों का बोलबाला हो, वहाँ बुद्धिमान व्यक्ति का चुप रहना ही उचित है जय सियाराम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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🌺 सियापति Shri Ram चंद्र की दिव्य अलौकिक कथा 🌺🙏 जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब मर्यादा और धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं। त्रेता युग में अयोध्या की पावन भूमि पर राजा दशरथ के महल में जन्म हुआ उस दिव्य प्रकाश का, जिन्हें हम सियापति Shri Ram के नाम से जानते हैं। उनके जन्म से ही अयोध्या में आनंद की लहर दौड़ गई थी। देवताओं ने पुष्पवर्षा की, और समस्त नगर जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। Shri Ram केवल एक राजा नहीं थे, वे मर्यादा पुरुषोत्तम थे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श मित्र। पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने राजपाट त्यागकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। उस समय उनके साथ माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी वन को प्रस्थान किए। यह त्याग केवल एक पुत्र का कर्तव्य नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को धर्म का मार्ग दिखाने वाला उदाहरण था। वनवास के दौरान अनेकों कठिनाइयाँ आईं। राक्षसराज रावण द्वारा माता सीता का हरण किया गया। तब Shri Ram ने वानरराज सुग्रीव और महाबली हनुमान के साथ मिलकर धर्म की सेना तैयार की। समुद्र पर सेतु निर्माण हुआ, और लंका में धर्म और अधर्म के बीच महायुद्ध छिड़ा। अंततः सत्य की विजय हुई, रावण का अंत हुआ और माता सीता की पुनः प्रतिष्ठा हुई। Shri Ram का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य और धैर्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु अंत में विजय उसी की होती है। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनके हृदय में करुणा थी, वाणी में मधुरता और कर्मों में दृढ़ता। आज भी जब हम “जय श्री राम” कहते हैं, तो वह केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि विश्वास, साहस और धर्म का प्रतीक है। सियापति Shri Ram का स्मरण हमारे मन को शांति देता है और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। Shri Ram के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँगे—सत्य बोलेंगे, बड़ों का सम्मान करेंगे, और धर्म के मार्ग पर अडिग रहेंगे। जय सियापति Shri Ram चंद्र की 🙏🚩 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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🌺 ​अटूट विश्वास: जब द्रौपदी ने उत्तरा को सिखाया जीवन का सबसे बड़ा पाठ! 🌺 हस्तिनापुर के राजमहल का एक शांत कोना। अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा तन्मयता से राजभवन की सेवा में लगी थीं। तभी वहां माता द्रौपदी का आगमन हुआ। उत्तरा के सरल स्वभाव और सेवा भाव को देखकर द्रौपदी का मातृत्व उमड़ पड़ा। उन्होंने अत्यंत स्नेह से उत्तरा के माथे पर हाथ फेरा और एक ऐसी बात कही जिसने उत्तरा को अचंभित कर दिया। "पुत्री उत्तरा, मेरी एक बात गांठ बांध लो। भविष्य में यदि तुम पर दुखों का पहाड़ भी टूट पड़े, घोर विपत्ति तुम्हें घेर ले, तो अपने किसी नाते-रिश्तेदार या सगे-संबंधी की ओर मत ताकना। उस समय केवल और केवल गोविंद की शरण में जाना।" उत्तरा का हाथ रुक गया। उनकी आंखों में विस्मय था। उन्होंने कौतूहलवश पूछा, "माता! आप ऐसा क्यों कह रही हैं? क्या अपनों से बढ़कर भी कोई सहारा होता है?" द्रौपदी की आंखों में अतीत की वो पीड़ा कौंध गई, जिसे उन्होंने स्वयं भोगा था। उन्होंने भारी स्वर में कहा: "पुत्री, यह सीख मैंने आंसुओं और अपमान की अग्नि में जलकर सीखी है। वह दिन मुझे आज भी याद है जब मेरे पांचों पति—जो विश्व के सर्वश्रेष्ठ योद्धा थे—कौरवों के साथ जुए के खेल में अपना सर्वस्व हार गए थे। अंत में उन्होंने मुझे भी दाँव पर लगा दिया और हार गए। जब दुशासन मुझे बालों से घसीटकर भरी सभा में लाया, तब मैंने कातर दृष्टि से अपने पतियों को पुकारा। पर जिनके बाहुबल पर मुझे गर्व था, वे सिर झुकाए मौन बैठे रहे। मैंने पितामह भीष्म, गुरु द्रोण और महाराज धृतराष्ट्र से न्याय की भीख मांगी, पर सबकी नीति और मर्यादा उस अधर्म के सामने मौन हो गई। जब संसार के सारे सहारे टूट गए और मैं पूर्णतः असहाय हो गई, तब मैंने अपनी दोनों भुजाएं उठाकर कृष्ण को पुकारा... और उसी पल चमत्कार हुआ।" हस्तिनापुर की सभा में जब द्रौपदी अपमानित हो रही थीं, उधर मीलों दूर द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत बेचैन थे। उनकी व्याकुलता देख देवी रुक्मिणी ने पूछा, "स्वामी! आप इतने विचलित क्यों हैं?" श्रीकृष्ण की आंखों में नमी थी। वे बोले, "प्रिये! आज मेरी एक परम भक्त संकट में है। दुष्ट उसे अपमानित कर रहे हैं।" रुक्मिणी ने तुरंत कहा, "तो आप प्रतीक्षा किस बात की कर रहे हैं? आप जाते क्यों नहीं?" भगवान ने मर्मस्पर्शी उत्तर दिया: "प्रिये! मर्यादा पुरुषोत्तम होने के नाते मैं बिना आह्वान के नहीं जा सकता। जब तक द्रौपदी को अपने बल, अपने पतियों के सामर्थ्य और बड़ों के न्याय पर भरोसा है, तब तक मैं द्वार के बाहर खड़ा हूं। पर जिस क्षण वह 'स्वयं' को त्यागकर मुझे पुकारेगी, मैं एक क्षण की भी देरी नहीं करूंगा।" भगवान ने आगे कहा, "रुक्मिणी, तुम्हें याद है? राजसूय यज्ञ के समय जब मेरी उंगली कट गई थी, तब सब उपचार ढूंढ रहे थे। पर द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी कीमती साड़ी का पल्लू फाड़कर मेरी उंगली पर बांध दिया था। आज उसकी साड़ी के उस छोटे से टुकड़े का कर्ज चुकाने का समय आ गया है।" जैसे ही द्रौपदी ने पुकारा— "हे गोविंद! हे द्वारकाधीश! लाज बचाइए!" भगवान तुरंत वहां प्रकट हुए और अनंत साड़ियों के ढेर ने द्रौपदी को ढक लिया। दुशासन खींचते-खींचते थक गया, पर वो चीर (साड़ी) कभी समाप्त नहीं हुई। द्रौपदी ने उत्तरा को समझाया कि संसार के रिश्ते कच्चे धागों जैसे हो सकते हैं, जो संकट में टूट सकते हैं। पर परमात्मा का साथ वह वज्र है जिसे कोई नहीं तोड़ सकता। "जब सब छोड़ दें, तब समझ लेना कि अब गोविंद ने आपका हाथ थाम लिया है।" #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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श्री राधारानी की चाहत हैं कृष्ण उनके दिल की विरासत हैं कृष्ण कितना भी रास रचा लें श्रीकृष्ण मगर दुनिया कहे श्री राधा कृष्ण.! मंजिल मेरी बस, तुम हो कान्हा फिर चाहे, मिले जनम सौ बार हर जन्म में यही हर बार मैं मांगू तेरी ही भक्ति और तेरा ही प्यार.!! #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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ज़िंदगी में प्रेम सबसे मुख्य है, पर उससे भी ज़रूरी है उस प्रेम में विश्वास होना। प्रेम भावनाओं का सैलाब है, विश्वास उसकी मज़बूत नींव। प्रेम बिना विश्वास के बह जाता है, विश्वास के साथ प्रेम टिक जाता है। प्रेम दिल की धड़कन है, विश्वास उसका यकीन। दोनों मिलें, तो ज़िंदगी खूबसूरत हो जाती है। राधे राधे,,,जय श्री कृष्ण 🙏♥️🙏♥️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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