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🌺 सियापति Shri Ram चंद्र की दिव्य अलौकिक कथा 🌺🙏 जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब मर्यादा और धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं। त्रेता युग में अयोध्या की पावन भूमि पर राजा दशरथ के महल में जन्म हुआ उस दिव्य प्रकाश का, जिन्हें हम सियापति Shri Ram के नाम से जानते हैं। उनके जन्म से ही अयोध्या में आनंद की लहर दौड़ गई थी। देवताओं ने पुष्पवर्षा की, और समस्त नगर जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। Shri Ram केवल एक राजा नहीं थे, वे मर्यादा पुरुषोत्तम थे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श मित्र। पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने राजपाट त्यागकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। उस समय उनके साथ माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी वन को प्रस्थान किए। यह त्याग केवल एक पुत्र का कर्तव्य नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को धर्म का मार्ग दिखाने वाला उदाहरण था। वनवास के दौरान अनेकों कठिनाइयाँ आईं। राक्षसराज रावण द्वारा माता सीता का हरण किया गया। तब Shri Ram ने वानरराज सुग्रीव और महाबली हनुमान के साथ मिलकर धर्म की सेना तैयार की। समुद्र पर सेतु निर्माण हुआ, और लंका में धर्म और अधर्म के बीच महायुद्ध छिड़ा। अंततः सत्य की विजय हुई, रावण का अंत हुआ और माता सीता की पुनः प्रतिष्ठा हुई। Shri Ram का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य और धैर्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु अंत में विजय उसी की होती है। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनके हृदय में करुणा थी, वाणी में मधुरता और कर्मों में दृढ़ता। आज भी जब हम “जय श्री राम” कहते हैं, तो वह केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि विश्वास, साहस और धर्म का प्रतीक है। सियापति Shri Ram का स्मरण हमारे मन को शांति देता है और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। Shri Ram के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँगे—सत्य बोलेंगे, बड़ों का सम्मान करेंगे, और धर्म के मार्ग पर अडिग रहेंगे। जय सियापति Shri Ram चंद्र की 🙏🚩 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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