M P SINGH
ShareChat
click to see wallet page
@3672347005
3672347005
M P SINGH
@3672347005
जय श्रीकृष्ण🙏राधे राधे🙏
प्यारी प्रीतम चरण-रज, दुर्लभ देहु मिलाय। धन्य धन्य वे रसिक जन, मन तन कुंजन आय ॥ - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर श्रीहित भोरीसखी जी कहती हैं कि ऐसी कृपा हो जाए कि अत्यन्त दुर्लभ श्रीहित लाड़िली-लाल के श्रीचरणों की रज में मैं भी रज बन कर मिल जाऊँ । #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
*मुस्कान उस यज्ञ की तरह है जिसकी हर आहुति के बादनइंसान को ऊर्जा,आत्मविश्वास और सकारात्मकता मिलती है।* ‼️🙏🦚 *जय श्रीकृष्ण* 🦚🙏‼️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
*वैचारिक मतभेद भले ही कितने हो जाएं* *लेकिन उम्र का लिहाज और शब्दों की मर्यादा हमेशा रखनी चाहिए।* ‼️🙏🧿 *जय श्रीहरि* 🧿🙏‼️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
*कलिजुग सम जुग आन नहिं,जौं नर कर बिस्वास।* *गाइ राम गुन गन बिमल भव,तर बिनहिं प्रयास॥* यदि मनुष्य विश्वास करे तो कलियुग के समान दूसरा युग नहीं है,क्योंकि इस युग में श्री रामजी के निर्मल गुणसमूहों को गा-गाकर मनुष्य बिना ही परिश्रम संसार रूपी समुद्र से तर जाता है,कल्याण हो जाता है। 🪷🪷 *जय सियाराम* 🪷🪷 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
*राम भगत हित नर तनु धारी।* *सहि संकट किए साधु सुखारी॥* *नामु सप्रेम जपत अनयासा।* *भगत होहिं मुद मंगल बासा॥* श्रीराम ने भक्तों के हित के लिए मनुष्य शरीर धारण करके स्वयं कष्ट सहकर साधुओं को सुखी किया,परंतु भक्तगण प्रेम के साथ नाम का जप करते हुए सहज ही में आनंद और कल्याण के घर हो जाते हैं। *जय सियाराम* 🌞🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
मनुष्य जीवन जीने के दो रास्ते हैं चिंता और चिंतन, चिंता स्वयं में एक मुसीबत है और चिंतन उसका समाधान,आसान से भी आसान कार्य को चिंता मुश्किल बना देती है और मुश्किल से मुश्किल कार्य को चिंतन बड़ा आसान बना देता है। ‼️🙏🦚 *जय श्रीकृष्ण* 🦚🙏‼️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
जीवन में बहुत सी वस्तुएँ उनके समीप जाने से ही प्राप्त हो जाती हैं जैसे अग्नि से गर्माहट,बर्फ से शीतलता और फूलों से सुगंध,किसी से भी कुछ माँगिए मत बस अपनी निकटता बढ़ाइए सबकुछ बिना मांगे ही प्राप्त होने लगेगा। 🌞🌞 *जय सियाराम* 🌞🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ भगवान विष्णु सभी का कल्याण करें, सभी को सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें, सभी का जीवन मंगलमय बनाएं। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
विष्णुकृपया जीवनं मंगलमयं च भवेत्:   धर्मः शान्तिः समृद्धिः नित्यं वर्धते: यः नारायणं श्रद्धया भजते:  सः दुःखानि त्यजति सौख्यंच लाभते: भगवान श्री विष्णु जी की कृपा से जीवन धर्म शांति समृद्धि और संरक्षण से परिपूर्ण हो जाता है ::   :जय श्री हरि विष्णु भगवान 🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
महाशिवरात्रि: अंधकार से प्रकाश की ओर एक महायात्रा 🔱 "न आदि है, न अंत है, शिव ही अनंत है, शून्य में जो गूंजता, वही ओंकार अत्यंत है। जो विष पीकर भी नीलकंठ कहलाए, उस महाकाल के चरणों में, यह जगत शीश झुकाए।" सनातनी परंपरा में महाशिवरात्रि केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक ब्रह्मांडीय घटना (Cosmic Event) है। यह वह रात्रि है जो सामान्य रात्रियों की तरह केवल 'अंधेरा' नहीं लाती, बल्कि अज्ञान की नींद से जगाकर 'शिवत्व' के प्रकाश की ओर ले जाती है। महाशिवरात्रि का अर्थ है-: शिव की महान रात्रि। पुराणों और श्रुतियों के अनुसार, इसके तीन प्रमुख पहलू हैं: * शिव-शक्ति का मिलन: यह वह रात्रि है जब वैराग्य के प्रतीक 'शिव' और शक्ति की प्रतीक 'माँ पार्वती' का विवाह हुआ था। यह जड़ और चेतन, पुरुष और प्रकृति के संतुलन का उत्सव है। * लिंगोद्भव: माना जाता है कि इसी रात भगवान शिव निराकार से साकार रूप में (लिंग रूप में) प्रकट हुए थे। * नृत्य और निश्चलता: यह रात उस 'तांडव' की भी है जो सृष्टि का चक्र चलाता है, और उस 'निश्चलता' की भी जो कैलाश पर ध्यानमग्न शिव में है। "मिट्टी का शरीर है, पर आत्मा शिव का अंश है, जो खुद को मिटा दे चरणों में, वही "मैं" का विध्वंस है। अहंकार की राख से ही, भस्म का श्रृंगार हो, जब 'मैं' खत्म हो जाए, तब ही शिव का साक्षात्कार हो।" महाशिवरात्रि को 'जागरण की रात्रि' क्यों कहा जाता है? इसके पीछे गहरा विज्ञान है: * ऊर्जा का प्राकृतिक चढ़ाव (Upsurge of Energy): खगोलीय रूप से, इस रात ग्रह ऐसी स्थिति में होते हैं कि उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में ऊर्जा का प्रवाह स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर होता है। * अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force): पृथ्वी की स्थिति और घूर्णन इस समय ऐसा होता है कि एक विशेष अपकेंद्रीय बल कार्य करता है। * रीढ़ की हड्डी (Spine): यदि आप इस रात अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा (Vertical) रखते हैं और सोते नहीं हैं, तो यह प्राकृतिक ऊर्जा आपके शरीर में ऊपर की ओर चढ़ती है, जो आध्यात्मिक जागृति और कुंडलिनी जागरण के लिए सहायक होती है। सरल शब्दों में, प्रकृति स्वयं आपको 'ऊपर उठाने' के लिए धक्का दे रही है, बस आपको उस प्रवाह के साथ जागते रहना है। 🧘 यह रात केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, यह आत्म-रूपांतरण (Self-Transformation) का अवसर है: * मौन रहें: बाहरी शोर को बंद करें ताकि भीतर का 'नाद' सुनाई दे। * ध्यान करें: अपनी रीढ़ सीधी रखें और अपनी श्वास पर ध्यान दें। * संकल्प लें: अपने भीतर की एक बुराई (काम, क्रोध, लोभ) को शिव को समर्पित कर दें। शिव 'भोले' हैं, वे आपके अवगुणों का विष पीकर आपको अमृत प्रदान करेंगे। "हे योगीश्वर! मेरी श्वासों की माला में, तेरा ही नाम पिरोया है, जागृत हो यह अंतर्मन, जो अब तक सोया है। इस घोर रात्रि में, ज्ञान का दीप जला देना, मुझे 'शव' से 'शिव' बनाकर, मुक्ति का मार्ग दिखा देना।" आप सभी को महाशिवरात्रि की अग्रिम अनंत शुभकामनाएँ। महादेव आपकी चेतना को सर्वोच्च शिखर तक ले जाएँ। ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ 🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat