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हर हर महादेव शम्भो, त्रिपुरारी देव दयाल। भस्म रमाए गंगाधर, कर दो जीवन निहाल॥ नागेन्द्र हार विभूषित, जटा में गंगा धारे। चन्द्र विराजे शिर पर, भक्तों के दुःख हारे॥ नीलकंठ हे कृपालु, करुणा सागर अपार। तेरी शरण जो आए, उसका हो उद्धार॥ डमरू की नाद गूंजे, तन-मन हो पावन। शिव नाम सुमिरन करते, कटते भव के बंधन॥ ॐ नमः शिवाय🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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