भगवान् विष्णुकी #मोहिनी माया जीव को मुक्त नहीं होने देती है, उसको अपने #वशमें कर लेती है। उससे मोहित हो जानेके कारण उसका पूर्वज्ञान नष्ट हो जाता है। इस प्रकार ज्ञानभ्रष्ट हो जानेपर वह जीव पहले तो बाल्यावस्थाको प्राप्त होता है, फिर क्रमशः कौमारावस्था, यौवनावस्था और वृद्धावस्थामें प्रवेश करता है। इसके बाद मृत्युको प्राप्त होता और मृत्युके बाद फिर जन्म लेता है। इस प्रकार इस संसार-चक्रमें वह #घटीयन्त्र (रहट) की भाँति घूमता रहता है।
संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण 539 गीताप्रेस गोरखपुर। पृष्ठ 42
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🤲अल्लाह हु अक़बर
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