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🔱 "भगवान शिव ने क्यों बसाई" थी रावण की लंका? जानिए क्या है इसके पीछे का शास्त्रसम्मत सत्य 🙏🚩
हम सभी जानते हैं कि रावण लंका का अधिपति था, लेकिन क्या आपको पता है कि उस दिव्य स्वर्ण लंका का निर्माण स्वयं देवाधिदेव महादेव ने करवाया था? आखिर वैरागी शिव को महल बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आज आपको उस रहस्यमयी कथा से अवगत कराएंगे, जो दिखाती है कि महादेव की कृपा और नियति का खेल कितना अद्भुत है!
📖 शास्त्रसम्मत प्रमाण (Scriptural Reference):
इस दिव्य कथा का वर्णन मुख्य रूप से 'स्कंद पुराण' और 'शिव पुराण' (रुद्र संहिता) में मिलता है। लंका के निर्माण का उद्देश्य और उसकी भव्यता का प्रमाण हमें यहाँ प्राप्त होता है:
"कृत्वा स्वर्णमयीं लङ्कां विश्वकर्मा महामतिः।
शम्भोरर्थे विशालाक्ष्याः प्रीत्यर्थं च नगोत्तमे॥"
(स्कंद पुराण, ब्रह्म खंड)
(अर्थ: महामति विश्वकर्मा ने विशाल लोचना माता पार्वती की प्रसन्नता के लिए और भगवान शिव के आदेश पर सुमेरु पर्वत के समीप स्वर्णमयी लंका का निर्माण किया।)
📜 विस्तृत पौराणिक कथा (The Full Story):
1. माता पार्वती की इच्छा:
कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी कैलाश पर महादेव और माता पार्वती से मिलने आए। वहाँ की अत्यधिक ठंड और महादेव के वैरागी जीवन को देखकर माता लक्ष्मी ने परिहास में पार्वती जी से पूछा कि "वे ऐसे खुले आकाश के नीचे कैसे रह लेती हैं?" माता पार्वती को यह बात चुभ गई और उन्होंने महादेव से एक अत्यंत सुंदर और भव्य महल बनाने का आग्रह किया।
2. स्वर्ण लंका का निर्माण:
महादेव तो ठहरे औघड़ दानी, उन्होंने तुरंत देव-शिल्पी विश्वकर्मा को बुलाया और संसार के सबसे भव्य महल के निर्माण का आदेश दिया। विश्वकर्मा ने समुद्र के बीच 'त्रिकुटाचल पर्वत' पर सोने की अद्भुत नगरी बसाई, जिसे 'लंका' कहा गया। यह महल इतना दिव्य था कि इसकी चमक से सूर्य भी फीका पड़ता था।
💡 निष्कर्ष (Conclusion):
भगवान शिव ने लंका का निर्माण प्रेम और ऐश्वर्य के प्रतीक के रूप में किया।