🔥"कलयुग" की शुरुआत कैसे हुई जानिए शास्त्रसम्मत सत्य।।🙏🚩
सादर प्रणाम!
क्या आपको पता है कि कलयुग की शुरुआत कैसे हुई थी? अगर नहीं पता तो पोस्ट को पढ़िए जानिए सारा सत्य। 👇
शास्त्र (मुख्यतः श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत) के अनुसार कलयुग की शुरुआत की घटना और स्थान का सटीक वर्णन यहाँ दिया गया है:
॥ कलयुग का प्राकट्य: स्थान और प्रमाण ॥
कलयुग की शुरुआत केवल समय से नहीं, बल्कि एक विशेष स्थान और घटना से जुड़ी है।
1. शुरुआत कहाँ से हुई? (स्थान का प्रमाण)
महाभारत के अनुसार, कलयुग का प्रथम प्रवेश 'सरस्वती नदी' के तट पर हुआ था। जब कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव हिमालय चले गए, तब अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित सरस्वती नदी के किनारे टहल रहे थे। वहाँ उन्होंने एक अत्यंत हृदयविदारक दृश्य देखा।
धर्म रूपी बैल और पृथ्वी रूपी गाय:
वहां एक सफेद बैल खड़ा था, जिसके तीन पैर कटे हुए थे और वह केवल एक पैर पर कांपते हुए खड़ा था। उसके पास ही एक गाय खड़ी थी, जो अत्यंत दुर्बल थी और उसकी आँखों में आँसू थे।
बैल कौन था? वह स्वयं 'धर्म' था।
गाय कौन थी? वह स्वयं 'पृथ्वी' माता थी।
धर्म के चार चरण (पैर):
सतयुग में धर्म के चार पैर थे— सत्य, तप, पवित्रता और दान।
त्रेतायुग में अधर्म के प्रभाव से 'तप' रूपी पैर कट गया।
द्वापरयुग में 'पवित्रता' रूपी पैर भी समाप्त हो गया।
कलयुग के आगमन पर केवल 'सत्य' का एक पैर शेष रह गया था।
कलि का प्रहार:
राजा परीक्षित ने देखा कि एक शूद्र वेशधारी राजा (जो स्वयं कलयुग था) अपने हाथ में डंडा लेकर उस बैल के अंतिम पैर 'सत्य' को भी तोड़ने का प्रयास कर रहा था और गाय (पृथ्वी) को लात मार रहा था।
राजा परीक्षित का क्रोध और कलि का आत्मसमर्पण:
यह देखकर राजा परीक्षित अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपनी तलवार निकाल ली। उन्होंने कलि से कहा— "मेरे राज्य में गौवंश और धर्म पर प्रहार करने वाले का वध निश्चित है!" मृत्यु को निकट देख कलि राजा के चरणों में गिर गया और प्राणों की भीख मांगने लगा।
कलयुग को मिले पांच स्थान:
शरणागत की रक्षा करना क्षत्रिय धर्म है, इसलिए परीक्षित ने उसे मारा नहीं, बल्कि रहने के लिए पांच स्थान दिए:
द्यूतं (जुआ)
पानं (मदिरा/नशा)
स्त्रिय: (अनैतिक संबंध)
सूना (हिंसा/पशु वध)
सुवर्ण (अन्याय से कमाया सोना)
निष्कर्ष:
जैसे ही कलयुग ने राजा के स्वर्ण मुकुट में प्रवेश किया, धर्म का ह्रास बढ़ गया। आज हम जिस युग में हैं, वहाँ धर्म केवल 'सत्य' के एक कमजोर पैर पर टिका है, जिसे बचाना हम सबका कर्तव्य है।
🌟 फेसबुक के लिए विशेष:
Like: यदि आप धर्म की रक्षा के संकल्प के साथ हैं।👍❤️
Comment: कलयुग के इस अंधकार में उजाले के लिए लिखें— 'जय श्री कृष्ण'। 💬
Share: इस महान कथा को साझा करें ताकि लोग अधर्म के स्थानों (नशा, जुआ आदि) से दूर रहें। 🔄
धर्म की इस गूढ़ जानकारी को जन-जन तक पहुँचाएं। 🔄
Follow: शास्त्रों के प्रामाणिक ज्ञान और सनातन धर्म की गहराई जानने के लिए हमसे जुड़ें।
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/
#🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🔱हर हर महादेव #🚩जय श्रीराम🙏 #🌷शुभ रविवार
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/