sn vyas
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9 days ago
#जय श्री कृष्ण धनि यह वृन्दावन की रैनु। नंदकिसोर चरावे गैयां, बिहरि बजावे बैनु॥ मन अतिमोहन कौ ध्यान धरै जो, सुख पावत चैनु। चलत कहां मन बसहिं सनातन, जहां लैनु नहीं दैनु॥ यहां रहौ जहाँ जूठन पावैं, ब्रजवासी के ऐनु। सूरदास ह्यांकी सरबरि नहिं, कल्पवृच्छ सुरधैनु॥ ...