भारतीय इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़े सबसे बड़े और विवादास्पद फैसलों में 1975 का आपातकाल, प्रेस पर प्रतिबंध, जबरन नसबंदी, और ऑपरेशन ब्लू स्टार शामिल हैं।1. 1975 का आपातकाल (Emergency):25 जून 1975 की रात, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। इस 21 महीने के दौरान संविधान के बुनियादी ढांचे को दरकिनार करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था।2. राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी:जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित एक लाख से अधिक पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मीसा (MISA - Maintenance of Internal Security Act) जैसे सख्त कानूनों के तहत बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया था।3. प्रेस सेंसरशिप और मीडिया पर पाबंदी:मीडिया की स्वतंत्रता को पूरी तरह से छीन लिया गया। समाचार पत्रों में छपने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी अनिवार्य थी, जिसके कारण कई अख़बारों ने विरोध स्वरूप अपने संपादकीय पन्ने खाली छोड़ दिए थे।4. जबरन नसबंदी अभियान (Forced Sterilization):आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के छोटे बेटे, संजय गांधी, ने बिना किसी आधिकारिक पद पर रहते हुए अत्यधिक सत्ता का इस्तेमाल किया। जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर देश भर में लाखों पुरुषों की जबरन और क्रूर तरीके से नसबंदी की गई, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैला।5. तुर्कमान गेट विध्वंस:दिल्ली के तुर्कमान गेट और आसपास के इलाकों में अवैध कब्जों को हटाने के नाम पर झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया गया। विरोध करने वालों पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गई थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे।6. न्यायपालिका और संविधान में बदलाव:सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1971 के उनके चुनाव को रद्द किए जाने के बाद (इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर), इंदिरा सरकार ने कई संविधान संशोधन (जैसे 39वां और 42वां संशोधन) किए, जिसने प्रधानमंत्री के पद को अदालती जांच से मुक्त कर दिया और न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित कर दिया।7. ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star):जून 1984 में, स्वर्ण मंदिर (अमृतसर) में छिपे हुए खालिस्तानी अलगाववादियों (जनरल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में) को बाहर निकालने के लिए उनके द्वारा सेना को अमृतसर के सबसे पवित्र सिख धार्मिक स्थल के भीतर भेजने का विवादास्पद आदेश दिया गया। इस सैन्य कार्रवाई में अकाल तख्त को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे सिख समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा हुई और इसी के परिणामस्वरूप 31 अक्टूबर 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।आपातकाल से जुड़ी और अधिक ऐतिहासिक जानकारी आप बीबीसी न्यूज़ या विकिपीडिया के विस्तृत लेखों में देख सकते हैं।
##IndiraGandhikekarnaame
Adhik matra me shere kijiye . 🙏🙏🙏