होमोफिलिया दिवस
विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस (डब्लूएचडी) हीमोफ़ीलिया एवं अन्य आनुवंशिक खून बहने वाले विकारों के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के लिए प्रतिवर्ष 17 अप्रैल को मनाया जाता है। यह ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया’ (World Federation of Hemophilia-WFH) की एक पहल है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत 1989 से की गई थी। विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस (डब्लूएचडी) को हीमोफीलिया तथा रक्तस्राव संबंधी अन्य आनुवंशिक विकारों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
यह एक ऐसा आनुवंशिक रोग है, जिसमें मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर 8 नहीं बनता, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' भी कहा जाता है। कई बार इस बीमारी की वजह से लीवर, किडनी, मसल्स जैसे इंटरनल अंगों में बिना किसी कारण रक्तस्त्राव होने लगता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो ख़ून में थक्के बनाने के लिए ज़रूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे ख़ून बहना अपने आप रुक जाता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है उनमें थक्के बनाने वाले घटक बहुत कम होते हैं। इसका मतलब है कि उनका ख़ून ज़्यादा समय तक बहता रहता है।
यहाँ "आनुवंशिक" का मतलब है, कि यह रोग जींस के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में पारित होता है। हीमोफिलिया रोग के वाहक एक्स गुणसूत्र में पाए जाते है। लगभग 10,000 पुरुषों में से 1 पुरुष के हीमोफीलिया से पीड़ित होने का ज़ोखिम होता है। महिलाएं ज्यादातर इस रोग के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक इकाइयों की वाहक की भूमिका निभाती हैं। हीमोफिलिया ए- यह हीमोफिलिया का बेहद सामान्य प्रकार है। इसमें रक्त में थक्के बनने के लिए आवश्यक ‘फैक्टर 8’ की कमी हो जाती है।
हीमोफिलिया बी- यह बेहद कम सामान्य है। हीमोफिलिया से पीड़ित लगभग बीस प्रतिशत लोगों में हीमोफिलिया बी होता है। हीमोफिलिया बी में क्लॉटिंग कारक (फैक्टर-9) की कमी हो जाती है। हीमोफिलिया बी, एक आनुवंशिक रक्त विकार है। यह माता-पिता से बच्चों में आने वाले जीन में खराबी से होता है। अक्सर महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चें में इस बीमारी के होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन कभी-कभी यदि जन्म से पहले जीन में किसी प्रकार का बदलाव आ जाए (म्यूटेशन), तो ऐसी स्थिति में भी होने वाले बच्चें को हीमोफिलिया बी हो सकता है।
#जागरूकता दिवस