बिहार: विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में गिरा, 16 जिलों की कनेक्टिविटी कटी; बड़ा हादसा टला
विक्रमशिला सेतु का करीब 34 मीटर लंबा स्लैब टूटकर नदी में समा गया। गनीमत रही कि जिला प्रशासन और पुलिस की सतर्कता से समय रहते ट्रैफिक रोक दिया गया, जिससे एक बड़ा जान-माल का नुकसान होने से बच गया। इस घटना के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली यह लाइफलाइन पूरी तरह से बंद हो गई है ।
इस पुल के बंद होने से सीमांचल समेत करीब 16 जिलों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लगभग 1 लाख लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों को अब मुंगेर पुल की ओर डायवर्ट किया गया है, और लोग मजबूरी में नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रखरखाव की कमी के कारण यह पुल लंबे समय से जोखिम भरा बना हुआ था।
सस्पेंशन और जांच: घटना के बाद लापरवाही बरतने के आरोप में पथ निर्माण विभाग ने संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित कर दिया है।
मरम्मत के प्रयास: मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात की है और पुल की मरम्मत में सेना (आर्मी) की मदद लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अतीत की चेतावनियां: मार्च 2026 में ही पुल के पिलर नंबर 17, 18 और 19 की सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
अस्थायी व्यवस्था: जिला प्रशासन ने पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी है और स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा के तेज बहाव और लगातार बढ़ते दबाव के कारण समय-समय पर इसके एक्सपेंशन जॉइंट्स में समस्या आती रही है, जिसके लिए ठोस और त्वरित रखरखाव की आवश्यकता थी। फिलहाल नया स्लैब बनाने और पुल को फिर से बहाल करने में प्रशासन द्वारा कम से कम 15 दिनों का समय लगने का अनुमान जताया गया है।
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